एक दो नहीं पूरे चौदह इतिहासिक कारणों से जानी जाती है 31 मई

डेस्क। इतिहास क्या होता है? क्यों हमेशा हम किसी पिछली घटना को अपने आज से तौल कर देखते हैं? क्या आप जानते हैं इतिहास हमें यह गिनाने के लिए बताया जाता है कि पहले हमने कितनी गलतियां की हैं जो आने वाले समय में हमें नहीं दोहरानी। इतिहास हमें अपनी नाकामियों कमजोरियों और गलतियों से कुछ सीखने के लिए दर्शाया जाता है। ऐसे में आज के दिन का इतिहास पूरी दुनिया के लिए बहुत खास है। आज के दिन दुनिया के कई हिस्सों में कुछ ऐसा हुआ था जिसके कारण आज के दिन को चौदह अलग-अलग रूपो में पूरी दुनिया के लोगों द्वारा याद किया जाता है।

सबसे पहले भारत की बात करें तो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के झंडे का अंगीकार आज के दिन ही हुआ था। महात्मा गांधी ने 1921 में 31 मई के दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ध्वज को स्वीकृत प्रदान की थी। 

31 मई दुनिया के लिए क्यों है खास-

सबसे पहले 1577 में मुगल सम्राट जहांगीर की पत्नी नूरजहां का जन्म इसी दिन हुआ था।

1727 में फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड ने पेरिस संधि पर हस्ताक्षर किया था।

1759 आते आते इसी तारीख को अमेरिका के उत्तर पूर्वी प्रांत पेंसिलवेनिया में थियेटर के सभी कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाया गया था।

साल 1878 की इसी तारीख को जर्मनी का युद्धपोत एसएमएस ग्रोसर करफर्स्ट के डूबने के कारण  284 लोगों की मौत हुई थी।

31 मई 1889 में अमेरिका के पेंसिलवेनिया स्थित जांसटाउन में भीषण बाढ़ से 2200 से अधिक लोगों की जान गई थी।

साल 1900 में लार्ड राबर्टस के नेतृत्व में ब्रिटिश सैनिकों ने जोहान्सबर्ग पर कब्जा इसी दिन किया था।

1907 में अमेरिका के न्यूयार्क शहर में पहली टैक्सी सेवा शुरू की गई थी।

1921 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के झंडे को अंगीकार किया गया था।

इसके साथ ही इसी दिन साल 1935 में पाकिस्तान के क्वेटा शहर में भीषण भूकंप से 50 हजार से अधिक लोगों की जान गई थी।

31 मई 1959 को ही बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा को तिब्बत से निर्वासन के बाद भारत में शरण प्राप्त हुई थी।

1964 में बंबई में इलेक्ट्रिक ट्राम अंतिम बार चली थी।

मई 31, 1966 में दक्षिणी वियतनाम के शासन के विरोध में ह्यू शहर में वियतनाम की बौद्ध युवती ने खुद को आग लगाकर अपनी जान दे दी थी। 

इसके बाद इसी दिन साल 1977 में भारतीय सेना के एक दल ने पहली बार विश्व के तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत शिखर कंचनजंगा पर चढ़ाई पूरी की थी।

2008 में विश्व के सबसे तेज धावक उसैन बोल्ट ने इसी तारीख को 100 मीटर दौड़ 9.72 सेकंड में पूरी कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था।। 

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