Masjid Imam Raped : मस्जिद के इमाम को नाबालिग बच्ची के यौन शोषण के आरोप में 20 साल कैद की सजा

Masjid Imam Raped : गुवाहाटी, नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण के मामलों में न्याय की प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। हाल ही में, असम के मोरीगांव जिले के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मोरीगांव जिले के एक मौलवी को नाबालिग बच्ची के यौन शोषण के आरोप में 20 साल कैद की सजा सुनाई है। यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज को यह संदेश देने के लिए भी है कि ऐसे गम्भीर अपराधों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी की पहचान इमाम मंजिल इस्लाम के रूप में हुई है, जो दक्षिण बालीडोंगा रहमानिया जामे मस्जिद नामक स्थानीय मस्जिद का इमाम था। 25 मार्च 2023 को भूरागांव थाने में इमाम मंजिल इस्लाम के खिलाफ नाबालिग लड़के से अप्राकृतिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया था। मामले की जांच करते हुए भूरागांव पुलिस ने संदिग्ध चरित्र वाले इमाम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।अदालत ने उन सभी सबूतों की जांच की, जिनसे पता चला कि इमाम ने नाबालिग लड़के के साथ अप्राकृतिक घिनौनी हरकत की है। यही नहीं आरोपी मंजिल इस्लाम ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी भी दी थी। सबूतों के आधार पर इमाम मंजिल इस्लाम को दोषी ठहराया और 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई और 10,000 का जुर्माना भी लगाया गया।

युवाओं और बच्चों की सुरक्षा समाज की जिम्मेदारी है। नाबालिग बच्चियों का यौन शोषण न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि यह एक समाजिक समस्या भी है, जो गहरी जड़ों वाले सांस्कृतिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक कारणों से प्रभावित होती है। ऐसे मामलों में सजा केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह पीड़ित को मानसिक सुकून देने का कार्य भी करती है।

हाल के वर्षों में, भारत में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में वृद्धि हुई है। इसी संदर्भ में, न्यायालयों की चयनित सजा देने की शक्ति अत्यंत आवश्यक हो जाती है ताकि उन अपराधियों को कठोरतम दंड दिया जा सके, जो समाज के सबसे कमजोर वर्ग पर हमला करते हैं। 20 वर्ष की सजा, इस दिशा में एक सशक्त कदम है, जो न केवल न्याय की पुष्टि करता है, बल्कि लोगों को यह सुझाव भी देता है कि ऐसे अपराधों की रोकथाम की आवश्यकता है।

अंततः, नाबालिगों के अधिकारों की रक्षा करना और समाज में यौन हिंसा के खिलाफ आवाज उठाना, सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। यह निर्णय इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो न केवल सजायाफ्ता को सजा देता है बल्कि आगे आने वाली पीढ़ियों को बेहतर सुरक्षा और समर्थन देने के लिए प्रेरित करता है।

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