ममता बनर्जी: क्या कांग्रेस विपक्षी खेमे में अकेली पड़ जाएगी?

क्या कांग्रेस विपक्षी खेमे में अकेली पड़ जाएगी? ममता बनर्जी के नेतृत्व में ‘इंडिया’ गठबंधन? इस सवाल ने राजनीतिक गलियारों में तूफ़ान मचा रखा है. लालू यादव, तेजस्वी यादव, शरद पवार और अखिलेश यादव जैसे दिग्गज नेताओं का समर्थन ममता के पक्ष में झुकता दिख रहा है. क्या ये कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है? आइए, विस्तार से जानते हैं इस राजनीतिक उथल-पुथल के पीछे के कारणों को.

1. क्या कांग्रेस अलग-थलग पड़ने वाली है?

भारतीय राजनीति में, ‘इंडिया’ गठबंधन ने एक नई बहस छेड़ दी है. ममता बनर्जी को नेता बनाए जाने के समर्थन में कई बड़े नेता उतर आए हैं. टीएमसी, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, एनसीपी (शरद पवार गुट), शिवसेना (उद्धव गुट), और आरजेडी ने ममता बनर्जी के नाम पर अपनी मुहर लगा दी है. क्या कांग्रेस के लिए यह वास्तव में ‘अलग-थलग’ होने का संकेत है? दिल्ली में केजरीवाल-पवार की बैठक और अखिलेश यादव का कांग्रेस के साथ ‘ठंडा’ रवैया, ये सब संकेत इस ओर इशारा करते हैं. यहाँ तक कि हरियाणा में कांग्रेस द्वारा अन्य विपक्षी दलों को नज़रअंदाज़ करने के फैसले से भी ये तस्वीर स्पष्ट होती दिखती है. इससे क्या कांग्रेस विपक्ष के भीतर ही कमज़ोर होती जा रही है?

कांग्रेस की चुप्पी और आगे का रास्ता

कांग्रेस का इस मामले पर मौन रहना कई सवाल खड़े करता है. क्या वह इस बदलते राजनीतिक समीकरण में अपनी भूमिका को लेकर अनिश्चित है? क्या ममता के बढ़ते प्रभाव को स्वीकार करने से वह अपनी वर्चस्व की छवि को कमज़ोर होते देखती है? कांग्रेस का अब आगे क्या कदम होगा यह आने वाला वक्त ही बता पाएगा।

2. ममता: मोदी मैजिक को चुनौती

ममता बनर्जी की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण है उनका बीजेपी के खिलाफ लगातार संघर्ष. बंगाल में मोदी मैजिक को कई बार फेल करती रही हैं वो. 2019 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की कोशिशें नाकाम रहीं, ये बात सभी के सामने है. ममता ने संदेशखाली मुद्दे, नागरिकता संशोधन कानून और शिक्षक भर्ती घोटाले जैसे मुश्किल मसलों को अपनी रणनीति से अपनी ताकत बनाया। 2024 के चुनावों के नतीजे इस बात की पुष्टि करते हैं कि वो बंगाल में बीजेपी के खिलाफ अकेली एक ऐसी नेता हैं, जिन्होंने खुद को बचा कर रखा।

ममता का जादू और उसका राजनीतिक प्रभाव

ममता की ये लगातार कामयाबी उनकी राजनीतिक सूझबूझ और जनता से जुड़ने की क्षमता दिखाती है। वो अपने विरोधियों पर हावी रहने का दम रखती हैं और ये एक ख़ास बात है. ये अनुभव विपक्षी एकता को मज़बूत करने में उनके लिए काम आ सकता है.

3. ममता: वंशवाद पर बीजेपी का हमला कमज़ोर

बीजेपी का हमेशा से कांग्रेस पर वंशवाद का आरोप लगाती आ रही है. लेकिन ममता बनर्जी एक सेल्फ़-मेड लीडर हैं. यह उनको बीजेपी के वंशवाद के आरोप से ऊपर उठाती है और उन्हें एक ज़बरदस्त प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित करती है. क्या ये बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती है?

ममता और मोदी: एक नई टक्कर?

ममता बनर्जी एक मजबूत नेता हैं और उनकी उपस्थिति बीजेपी के खिलाफ एक नयी टक्कर का अंदेशा जगाती है. ये टक्कर लोकप्रियता की नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति की हो सकती है और इसे भूलना नहीं चाहिए.

4. लालू का समर्थन: इंडिया गठबंधन की नई दिशा?

लालू यादव का ममता के लिए समर्थन, और कांग्रेस को किनारे करने की बात, ‘इंडिया’ गठबंधन के भविष्य पर कई सवाल उठाता है. क्या यह गठबंधन की रणनीति में एक बड़ा बदलाव का सूचक है? लालू का यह समर्थन इंडिया गठबंधन में नयी ऊर्जा ला सकता है या इसे तोड़ सकता है, ये वक्त ही बताएगा.

भविष्य का अंदाजा

आगे क्या होगा ये इस समय कहना मुश्किल है। लेकिन इतना साफ़ है कि ममता बनर्जी ने भारतीय राजनीति में अपना दम दिखाया है, और उनका उदय कांग्रेस के लिए कई तरह के सवाल खड़े करता है।

Take Away Points:

  • ममता बनर्जी का नेतृत्व ‘इंडिया’ गठबंधन में एक बड़ा बदलाव ला सकता है.
  • कांग्रेस की चुप्पी और अन्य दलों का ममता के प्रति झुकाव कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकता है।
  • ममता की लोकप्रियता और बीजेपी के खिलाफ उनकी ताकत ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में एक मुख्य किरदार बना दिया है.
  • लालू यादव का समर्थन ‘इंडिया’ गठबंधन की रणनीति को नया मोड़ दे सकता है।

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