Maharashtra : BJP सरकार बनाने में इतनी क्यों है खामोश, जानिये असली वजह ?

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नई दिल्ली। महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर जारी गतिरोध के बीच शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने रविवार को कहा था कि उनकी पार्टी भाजपा से केवल मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर ही बातचीत करेगा। राज्य में 24 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से दोनों गठबंधन साझीदारों के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर गतिरोध बना हुआ था।

इस चुनाव में 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना ने 56 और भाजपा ने 105 सीटों पर जीत दर्ज की. राउत ने पत्रकारों से कहा था कि गतिरोध जारी है. सरकार गठन को लेकर अभी कोई बातचीत नहीं हुई है। अगर बातचीत होगी, तो केवल मुख्यमंत्री पद को लेकर ही होगी।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि महाराष्ट्र में चुनाव नतीजे आने के 12 दिन बाद भी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश नहीं किया है। बीजेपी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की कार्यशैली को देखें तो जो कुछ महाराष्ट्र में हो रहा है, वो इनकी कार्यशैली से मिलता नहीं है।

ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर बीजेपी इस बार सरकार बनाने में इतनी खामोश क्यों है। क्या बीजेपी के शांत रहने के पीछे सिर्फ विधानसभा में विधायकों का वोट गणित है या शीर्ष नेतृत्व किसी दूसरे प्लान पर काम कर रहा है।

सूत्रों की मानें तो बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के कुछ नेताओं का मानना है कि महाराष्ट्र में अगर बीजेपी सरकार से बाहर हो जाती है तो लंबे दौर में उसका फायदा है, क्योंकि वर्तमान दौर में राज्य में बीजेपी को सबसे ज्यादा खतरा शिवसेना से है।

पिछले एक दशक में बीजेपी देश में अकेली हिंदू हितैषी पार्टी के रूप में स्थापित हुई है। लेकिन शिवसेना बार-बार उसकी इस छवि पर हमला करती रहती है। लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले भी उद्धव ठाकरे ने अयोध्या का दौरा कर राम मंदिर मामले में बीजेपी को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी, इसका मकसद सिर्फ सीटों के बंटवारे में बीजेपी पर दबाव बनाना था।

ऐसे में अगर शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस के मदद से राज्य में सरकार बना लेती है तो उसकी हिंदूवादी छवि पर इसका सीधा असर पड़ेगा। शिवसेना को भी पता है कि अगर एक बार कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना ली तो उसका भविष्य खतरे में है शिवसेना को भी पता है कि अगर एक बार कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना ली तो उसका भविष्य खतरे में है।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भले ही बीजेपी को रोकने के नाम पर शिवसेना को कांग्रेस और एनसीपी का समर्थन मिल जाए, लेकिन ये सरकार चलने वाली नहीं है, यानी महाराष्ट्र में या तो राजनीतिक दलों में विद्रोह हो जाएगा या जल्दी विधानसभा चुनाव हो जाएंगे, ऐसे में इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा।

ऐसा नहीं कि इस गणित को सिर्फ बीजेपी नेता ही समझ रहे हैं। शिवसेना को भी पता है कि अगर एक बार कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना ली तो उसका भविष्य खतरे में है, क्योंकि ये सरकार कुछ दिन ही चलेगी और यदि विधानसभा चुनाव जल्दी हो गए तो उसका परंपरागत वोट बैंक सिर्फ कुछ दिनों की सरकार के नाम पर खिसक जाएगा।

शायद यही वो कारण है कि बार-बार मीडिया के सामने बड़े-बड़े दावे करने वाली शिवसेना ने अब तक राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के सामने जाकर सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश नहीं किया है।

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