Love story: प्रेग्नेंट इंदिरा को छोड़ किसी और के इश्क में थे फिरोज
संभव है कि तब वह भारत की प्रधानमंत्री भी नहीं बनतीं. वैसे इंदिरा का पहला प्यार फिरोज नहीं बल्कि शांति निकेतन के उनके एक विदेशी शिक्षक थे.
इंदिरा का बचपन इलाहाबाद में बीता था. पिता जवाहर लाल नेहरू उनमें अपना बेटा देखते थे. वह उनकी हर मांग पूरी करते थे. एक ही बार उन्होंने अपनी बेटी की इच्छा का विरोध किया था, बल्कि कहना चाहिए खासे नाराज भी हुए थे. लेकिन इसके बाद भी बेटी अड़ी रही और उसने वही किया, जो वह करना चाहती थी.
हालांकि, पिता से विरोध के बावजूद शादी करने के बाद इंदिरा को महसूस होने लगा कि उन्होंने जीवन में एक बड़ी गलती की है. निधन से महज एक महीने पहले मां कमला नेहरू को महसूस हो चुका था कि उनकी प्रिय बेटी इंदु गलती कर रही है. इससे उसका जीवन दुखमय हो जाएगा.
जब फिरोज के प्रेम में पड़ीं तो वह राजनीति की चकाचौंध से दूर होकर शादी करना और सादगीभरी जिंदगी बिताना चाहती थीं
सादगीभरी जिंदगी बिताना चाहती थीं
इंदिरा गांधी की जीवनी लेखिका पुपुल जयकर के अनुसार, इंदिरा जब फिरोज के प्रेम में पड़ीं तो वह राजनीति की चकाचौंध से दूर होकर शादी करना और सादगीभरी जिंदगी बिताना चाहती थीं, जिसमें वह और उनका परिवार हो. लेकिन शादी के बाद जब दूरियां बढने लगीं तो इंदिरा ने राजनीति में शिरकत करनी शुरू कर दी. इसने फिरोज के साथ उनके मतभेदों को और बढ़ा दिया. इंदिरा अगर एक ओर पति की बेवफाई से निराश थीं तो उनके पिता नेहरू भी फिरोज को कतई पसंद नहीं करते थे. जिससे ये स्थितियां बनती गईं कि दोनों का विवाहित जीवन करीब करीब खत्म हो गया. अपने निधन से कुछ महीने पहले फिरोज से तलाक लेकर दूसरी शादी करने का फैसला कर चुके थे.
जब फिरोज मोहित हो गए
फिरोज का इलाहाबाद के आनंद भवन में प्रवेश जवाहरलाल नेहरू की पत्नी कमला की मदद के लिए एक वालिंटियर के रूप में हुआ था. उसके कुछ ही समय बाद शहर में इंदिरा और फिरोज के अफेयर के चर्चे होने लगे. जब कमला बीमार हुईं और आनंद भवन में थीं तब इंदिरा ने जिस तरह नर्स के रूप में अपनी मां की सेवा की, उससे फिरोज बहुत प्रभावित हो गए थे. इंदिरा सुंदर तो थीं और उस उम्र में उनमें गजब का आकर्षण भी था.
पुपुल जयकर ने अपनी किताब में लिखा है, तब फिरोज ने इंदिरा की ओर ध्यान देना शुरू किया. वह उनके आगे-पीछे मंडराने लगे. वह मौका देखने लगे कि इंदिरा के करीब कैसे रह सकते हैं. हालांकि इंदिरा को उस समय ये सब पसंद नहीं था.
इंदिरा को पढाई के लिए लंदन भेज दिया गया. वह वहां अकेली थीं. दूसरे विश्व युद्ध से पहले लंदन में अलग तरह का माहौल था. फिरोज भी कुछ समय बाद लंदन रवाना हो गए.
ये शादी नहीं हो सकती
जवाहरलाल नेहरू के विशेष सचिव एमओ मथाई अपनी किताब रिमिनिसेंसेज ऑफ द नेहरू एज में लिखते हैं, इंदिरा ने उन्हें बताया कि जब वह 16 साल की होने वाली थीं, उससे पहले ही एक दिन फिरोज ने उनके सामने प्रेम निवेदन किया और शादी का प्रस्ताव रख दिया. इंदिरा अवाक रह गईं, क्योंकि उन्हें फिरोज से ये उम्मीद नहीं थी. वह नाराज ही नहीं हो गईं बल्कि उनके इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया. मां से शिकायत अलग कर दी. कमला भी ये जानकर नाराज हुईं. उन्होंने दो टूक फरमान सुनाया-ये शादी नहीं हो सकती. इसके बाद भी फिरोज का आनंद भवन आना जाना लगा रहा.
लंदन में जीता इंदिरा का दिल
इंदिरा को पढाई के लिए लंदन भेज दिया गया. वह वहां अकेली थीं. दूसरे विश्व युद्ध से पहले लंदन में अलग तरह का माहौल था. फिरोज भी कुछ समय बाद लंदन रवाना हो गए. वहां उन्होंने भी लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में दाखिला ले लिया. मकसद उनका केवल इतना था कि वहां वो इंदिरा के नजदीक आ पाएंगे. इसमें उन्हें सफलता भी मिली. आखिरकार उन्होंने लंदन में इंदिरा का दिल जीत लिया. फिरोज के मित्र और जाने माने पत्रकार निखिल चक्रवर्ती ने अपनी किताब में लिखा कि फिरोज महिलाओं के प्रति आकर्षित हो जाते थे. लंदन में बेशक इंदिरा से नजदीकियां बढा रहे थे, लेकिन वहां भी उनके अफेयर कई महिलाओं से हो चुके थे. इंदिरा को इसकी भनक तक नहीं थी.
फिरोज से गुप्त विवाह
कैथरीन फ्रेंक ने अपनी किताब इंदिराः द लाइफ ऑफ इंदिरा नेहरू गांधी में लिखती हैं, इंदिरा और फिरोज ने गुप्त विवाह कर लिया था. सार्वजनिक विवाह होने से पहले ही दोनों ने पति और पत्नी की तरह साथ रहना शुरू कर दिया था. जब इंदिरा ने पिता से कहा कि उन्हें फिरोज से प्यार है और वह उनसे शादी करना चाहती हैं तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया था. नेहरू और उनका परिवार इस शादी के सख्त खिलाफ था. मथाई की किताब कहती है कि पद्मजा नायडु ने नेहरू से कहा, उनकी बेटी बड़ी हो चुकी है. अगर दोनों ने शादी करनी चाही तो वह उसे रोक नहीं पाएंगे, लिहाजा उन्हें इसकी अनुमति दे देनी चाहिए. नेहरू ने अनिच्छा से अनुमति दे दी.
इंदिरा गर्भवती थीं और फिरोज का अफेयर चल रहा था
शादी के जल्द बाद ही इंदिरा और फिरोज में खटपट शुरू हो गई. साल 1941 में जब वह गर्भवती थीं और राजीव गांधी का जन्म होने वाला था तो उन्हें पता लगा कि फिरोज किसी और महिला से इनवाल्व हैं. उनके कानों में फिरोज के अफेयर के एक नहीं कई किस्सों की खबरें पहुंच रही थीं. इससे वो दुखी हो गईं. पति की बेवफाई ने रिश्तों में दूरी बढानी शुरू कर दी. कैथरीन फ्रेंक की किताब “इंदिराः द लाइफ ऑफ इंदिरा नेहरू गांधी” कहती है कि फिरोज बिंदास जिंदगी जीने में यकीन रखते थे, जिसमें खाने-पीने और सेक्स की कोई सीमा नहीं थी. किताब के अनुसार, “इंदिरा से शादी के बाद भी फिरोज दूसरी महिलाओं से फ्लर्ट करते थे. महमूना सुल्तान के अलावा उनके रोमांटिक रिश्ते संसद की ग्लैमर गर्ल कही जाने वाली तारकेश्वरी सिन्हा, सांसद सुभद्रा जोशी से रहे. उनकी एक और गर्लफ्रेंड थी, जो खूबसूरत नेपाली तलाकशुदा महिला थी और आलइंडिया रेडियो में काम करती थी. उसके ससुराल पक्ष के लोग केरल के बड़े अभिजात्य परिवार से थे.”
पहला प्यार फ्रेंच शिक्षक से
हालांकि, फिरोज उनके जीवन में आने वाले पहले शख्स नहीं थे. जब वह पुणे में मैट्रिक करने के बाद शांतिनिकेतन में पढने गईं थीं तो फ्रेंच पढाने वाले जर्मन शिक्षक फ्रेंक ओबरडॉफ उनके प्यार में पड़ गए. पुपुल जयकर ने इंदिरा गांधी बॉयोग्राफी में लिखा कि ओबरडॉफ 1933 में शांतिनिकेतन आए थे. उनकी रविंद्रनाथ टैगोर से मुलाकात 1922 में लातीन अमेरिका में हुई थी. टैगोर ने उसे शांतिनिकेतन आने का प्रस्ताव दिया. जब उसने इंदिरा को फ्रेंच पढानी शुरू कर दी तो वह 16 साल की थीं. इंदिरा को पढाते-पढाते वह उनकी सुंदरता पर मोहित हो गए. बेहिचक उनके आगे प्यार का प्रस्ताव रखा. इंदिरा खफा हो गईं. लेकिन समय के साथ उनमें नजदीकियां हो गईं. इंदिरा के अपने दर्द थे. उसे वो जर्मन शिक्षक से बांटती थीं और फ्रेंक लगातार उनकी सुंदरता की तारीफ करता रहता था. जब टैगोर को ये पता चला तो उन्होंने इंदिरा को तुरंत वापस घर भेज दिया. हालांकि बाद में फ्रेंक की मुलाकात लंदन में इंदिरा से हुई. उसने फिर से इंदिरा को मनाने की कोशिश की लेकिन तब तक उनके जीवन में फिरोज का आगमन हो चुका था. लिहाजा वो फ्रेंक से बहुत रुखे तरीके से पेश आईं.
जीवन में आए अन्य पुरुष
कैथरीन फ्रेंक अपनी किताब में लिखती हैं कि इंदिरा के जीवन में बाद में दो और पुरुष आए. इनमें धीरेंद्र ब्रह्मचारी और दिनेश सिंह शामिल थे. इंदिरा ने अपनी विश्वस्त डोरोथी नार्मन को धीरेंद्र के बारे में लिखा, वह एक आकर्षक योगी हैं, जिनसे वह योग सीख रही हैं. दिनेश पर भी वह बहुत भरोसा करती हैं. प्रधानमंत्री हाउस में उनका बेरोकटोक किसी भी समय आना जाना था. फ्रेंक लिखती हैं कि इंदिरा से अफेयर की चर्चाओं को शायद दिनेश सिंह ने खुद ही हवा दी.
मथाई ने कहा- मुझसे चला था इंदिरा का अफेयर
वैसे तो एमओ मथाई ने खुद दावा किया कि इंदिरा का उनसे लंबे समय तक अफेयर रहा. उन्होंने अपनी किताब में शी के नाम से एक चैप्टर लिखा, जिसे फिर खुद ही प्रकाशित होने से रोक लिया. बताते हैं कि अस्सी के दशक में ये चैप्टर पता नहीं कहां से बाहर निकल आया. कहा जाता है कि इसे जाहिर करने में मेनका गांधी का हाथ था, जिसे उन्होंने उन लोगों को दिया, जो इंदिरा के विरोधी थे. मथाई के दावे में कितनी सच्चाई थी, इसके बारे में तमाम बातें कही जाती हैं. हालांकि फिरोज गांधी ने खुद संसद के सेट्रल हाल में कई सांसदों की मौजूदगी में कहा था, नेहरू के असली दामाद तो मथाई हैं. कैथरीन फ्रेंक और मथाई दोनों लिखते हैं कि फिरोज अक्सर संसद में सांसदों के बीच मथाई को नेहरू का दामाद होने का आरोप लगाते थे. मथाई लिखते हैं, 1948 में स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर ने मुझसे कहा, उनकी मौजूदगी में ही फिरोज गांधी ने सेंट्रल हाल में सांसदों के एक ग्रुप से कहा, वह नहीं बल्कि मथाई प्रधानमंत्री के दामाद हैं.
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