Lal Bahadur Shastri Jayanti 2022: आज तक पहेली बना हुआ है मौत का सच

डेस्क। देश के दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को वाराणसी में हुआ।  लाल बहादुर 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। बता दें कि 11 जनवरी 1966 को उज्बेकिस्तान के ताशकंद में उनकी मौत हुई थी। वहीं साल 1965 के युद्ध के बाद वह पाकिस्तान से वार्ता करने के लिए भी वहां गए थे।

वहीं बैठक में भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर भी किए थे। 

आपको बता दें 11 जनवरी 1966 की रात को संदिग्ध परिस्थितियों में शास्त्री जी की मौत हो गई थी। पर उनकी मौत कैसे हुई, यह 49 साल के बाद बीत जाने के बाद भी आज तक एक राज बना पड़ा है।

वहीं मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि शास्त्रीजी की मौत हार्ट अटैक के चलते हुई थी लेकिन उनकी पत्नी का आरोप था कि उन्हें जहर देकर मारा गया था।

बताया जाता है कि लालबहादुर शास्त्री की मौत के बाद उनका शरीर नीला पड़ गया था जिससे इस बात को तूल मिला कि उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से नहीं, बल्कि उनको जहर दिया गया था। इसके बाद उनकी ड्यूटी पर तैनात बटलर को गिरफ्तार भी किया गया था, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिलने पर उसे छोड़ दिया गया। वहीं बटलर के बयान पर भी कई सवाल खड़े हुए। साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय में वह केस फाइल मौजूद है, लेकिन उसे अभी भी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

शास्त्री जी की मौत की पहली जांच राज नारायण ने की थी, वहीं इसमें कोई नतीजा नहीं निकला था। साथ में यह भी आरोप लगाए जाते हैं कि शास्त्री जी का पोस्टमार्टम नहीं हुआ था। और साल 2009 में केंद्र सरकार ने कहा कि शास्त्री के निजी डॉक्टर आरएन चुग और रूस के कुछ डॉक्टरों ने मिलकर उनकी मौत की जांच की पर सरकार के पास उसका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।

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