केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना: मध्य प्रदेश का बदलता भविष्य!
क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी परियोजना है जो मध्य प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र को हरा-भरा बनाने जा रही है? जी हाँ, हम बात कर रहे हैं केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की, जिसकी आधारशिला खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 दिसंबर को रखेंगे! यह परियोजना सिर्फ़ पानी की समस्या ही नहीं सुलझाएगी, बल्कि क्षेत्र के विकास और समृद्धि का द्वार भी खोलेगी। आइए जानते हैं इस महत्वाकांक्षी परियोजना के बारे में विस्तार से।
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना: एक क्रांति
यह परियोजना मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र को पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। केन और बेतवा नदियों को जोड़कर, 10.62 लाख हेक्टेयर ज़मीन में सिंचाई की सुविधा मिलेगी, जिससे किसानों की आय में बढ़ोत्तरी होगी और क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा। इससे लगभग 62 लाख लोगों को पीने के पानी की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी, जो एक बड़ी उपलब्धि है। इस परियोजना के दूरगामी परिणामों को देखते हुए, यह कहा जा सकता है कि यह बुंदेलखंड के पुनर्जागरण का प्रतीक है।
परियोजना से लाभान्वित जिले
मध्य प्रदेश के कई जिले इस परियोजना से सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे, जिनमें छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा और सागर शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के कुछ जिले भी इस परियोजना से लाभान्वित होंगे। इसके अलावा, यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, क्योंकि यह जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद करेगी।
पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना: और एक बड़ी पहल
केन-बेतवा परियोजना के अलावा, मध्य प्रदेश सरकार ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना को भी मंज़ूरी दी है। यह परियोजना मध्य प्रदेश के 6.13 लाख हेक्टेयर में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराएगी और प्रधानमंत्री मोदी 17 दिसंबर को जयपुर में इसकी आधारशिला रखेंगे। यह परियोजना मध्य प्रदेश के विकास में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
लाभान्वित क्षेत्र और जनसंख्या
पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना से गुना, शिवपुरी, सीहोर, देवास, राजगढ़, उज्जैन, आगर-मालवा, इंदौर, शाजापुर, मंदसौर और मुरैना जैसे महत्वपूर्ण जिले लाभान्वित होंगे। यह परियोजना न सिर्फ़ सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराएगी, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी योगदान देगी।
‘उद्योग वर्ष’ 2025: मध्य प्रदेश का विकास क्षितिज
मध्य प्रदेश 2025 को ‘उद्योग वर्ष’ के रूप में मनाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24-25 फरवरी को भोपाल में आयोजित होने वाले वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस शिखर सम्मेलन से राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश की उम्मीद है, जिससे रोज़गार के अवसरों में वृद्धि होगी और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
निवेश और रोज़गार में वृद्धि
राज्य सरकार पहले ही पूरे मध्य प्रदेश में क्षेत्रीय उद्योग सम्मेलन आयोजित कर रही है और राज्य तथा विदेशों में रोड शो तथा सम्मेलन आयोजित कर रही है। इन प्रयासों से राज्य को 4 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे 3 लाख रोज़गार सृजित होंगे। यह मध्य प्रदेश के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
जनकल्याण पर्व और मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान: गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं
मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर, ‘जनकल्याण पर्व’ और ‘मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान’ नामक दो कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाना है।
लाभार्थियों की पहचान और योजनाओं से जुड़ाव
‘जनकल्याण पर्व’ के दौरान कई विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया जाएगा, जबकि ‘मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान’ के तहत लाभार्थियों की पहचान करके उन्हें विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा। ‘लाड़ली बहना’ योजना जैसी लोकप्रिय योजनाओं ने पहले ही लाखों महिलाओं को लाभ पहुँचाया है।
Take Away Points:
- केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजनाएँ मध्य प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
- ‘उद्योग वर्ष’ 2025 राज्य में निवेश और रोज़गार के अवसरों में वृद्धि करेगा।
- ‘जनकल्याण पर्व’ और ‘मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान’ गरीबों और जरूरतमंदों को लाभ पहुँचाएंगे।

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