कानपुर, जिन पक्षियों को आप अपने आस-पास देखते हैं। जिनके बारे में सुनते हैं। जिनकी प्रकृति के बारे में आप जानना चाहते हैं। ऐसे पक्षियों को आप चिड़ियाघर में न केवल देखते सकते हैं बल्कि बटन दबाते ही उनकी आवाजें आपके कानों में गूंजने लगेंगी। हम बात कर रहे हैं चिड़ियाघर के अनुभूति केंद्र की। यह अनूभूति केंद्र दर्शकों के लिए चिड़ियाघर के आकर्षण को बढ़ा रहा है। दो महीने पहले शुरू हुए चिड़ियाघर के अनुभूति केंद्र की रिपोर्ट प्रशासन ने तैयार की है वह बताती है कि बच्चों को यह सबसे ज्यादा पसंद आ रहा है। चिड़ियाघर घूमने के दौरान पांच से 16 वर्ष तक के बच्चे यहां आना बेहद पसंद करते हैं।
पर्यटन के अलावा ज्ञानवर्धक भी है यह केंद्र
यहां पर उन चिड़ियों के बारे में बच्चे जान सकते हैं जो उनके इर्द-गिर्द घूमती रहती हैं या ऐसे पक्षी जिनके बारे में वह किताबों में पढ़ा करते हैं। तीन दर्जन से अधिक पक्षियों की आवाज वह केवल एक बटन दबाकर सुन सकते हैं। इसके अलावा यह केंद्र कानपुर का इतिहास व गंगा का महत्व भी बता रहा है। अनूभूति केंद्र की खासियत यह है कि यहां पर दर्शक देख सकते हैं कि किस प्रकार जल प्रदूषण शहर में बढ़ रहा है। यहां पर एक गाइड भी चिड़ियाघर ने दर्शकों को मुहैया कराया है जो उन्हंे अनूभूति केंद्र में बने चिड़ियों के स्पीच बाॅक्स के बारे में जानकारी देने के साथ उनमें बने पक्षियों की प्रकृति व उनके खान-पान के बारे में बताता है। यही कारण है कि बच्चे ही नहीं बल्कि बड़े भी अनुभूति केंद्र बार बार आना पसंद करते हैं।
सहायक निदेशक अरविंद सिंह ने बताया कि यह प्रदेश का पहला चिड़ियाघर है जहां इस प्रकार का कोई केंद्र बनाया गया है। प्राकृतिक वातावरण के बीच यह विकसित किया गया है। यहां पर बनाए गए कमरों में प्रकृति की छटा नजर आती है। इसे अभी और विस्तार दिया जाएगा जिसकी तैयारी चल रही है।
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