झारखंड में आलू की कीमतों में भारी उछाल: क्या है असली वजह?

झारखंड में आलू की कीमतों में आसमान छूती उछाल! क्या है असली वजह?

आलू, भारतीय खाने की रसोई का एक अभिन्न अंग है, लेकिन हाल ही में झारखंड में इसके दामों में भारी उछाल देखने को मिला है. क्या आप जानते हैं कि आलू के इस दामों के ‘चढ़ाव’ के पीछे असली वजह क्या है? आइये जानते हैं इस ‘आलू संकट’ की पूरी कहानी!

बंगाल से झारखंड आलू आपूर्ति में अचानक रुकावट

झारखंड में आलू की बढ़ती कीमतों की असली वजह है पश्चिम बंगाल से झारखंड में आलू की आपूर्ति में आई अचानक रुकावट. पिछले तीन दिनों से धनबाद के मैथन स्थित डिबुडीह चेक पोस्ट पर बंगाल से आने वाले आलू से लदे ट्रकों को रोका जा रहा है, जिससे झारखंड में आलू की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. 60-70% आलू बंगाल से आता है और यह रुकावट आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही है।

क्या है रुकावट की असली वजह?

इस रुकावट की असली वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन आशंका है कि बंगाल में आलू की पैदावार में कमी और दीपावली तक हुई बारिश इसकी एक बड़ी वजह हो सकती है. बंगाल अपनी आपूर्ति को बनाए रखने की कोशिश में हो सकता है। इससे झारखंड के उपभोक्ताओं को आलू की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है और कीमतें आसमान छू रही हैं।

आलू की बढ़ती कीमतों का असर: आम आदमी पर पड़ा बोझ

आलू की कीमतों में भारी इजाफे से झारखंड के आम उपभोक्ता पर सीधा असर पड़ रहा है. सफेद आलू की कीमतें 2100 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं, जिससे खुदरा बाजार में आलू 35 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है. लाल आलू 40 रुपये किलो और नया आलू 50 रुपये किलो तक पहुंच गया है. यह एक बहुत बड़ा झटका है, खासकर निम्न-मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए जिनका खाने का बड़ा हिस्सा आलू पर निर्भर है. कई लोग आलू खरीदने में अब असमर्थ हो गए हैं और विकल्प ढूंढने पर मजबूर हैं।

क्या झारखंड सरकार कर रही है कोई कार्यवाही?

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले का संज्ञान लिया है और मुख्य सचिव को तत्काल समाधान निकालने का निर्देश दिया है. पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से बातचीत की जा रही है. धनबाद के सांसद, ढुल्लू महतो, ने इस स्थिति को बंगाल सरकार की तानाशाही बताया है और इस मामले को लोकसभा में उठाने की बात कही है.

विकल्पों पर विचार: यूपी से आपूर्ति

झारखंड की आलू की दैनिक खपत 80 से 110 ट्रक तक होती है. बंगाल से आपूर्ति बाधित होने से झारखंड में आलू की भारी कमी हो रही है. सरकार यूपी से आलू की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश कर रही है लेकिन कीमतें काफी ज़्यादा हैं. यह एक अस्थाई समाधान हो सकता है लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है, क्योंकि यह झारखंड के लिए अधिक महंगा पड़ेगा।

क्या होगा आगे?

अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो इससे झारखंड में आलू की कीमतें और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं, और इससे मुद्रास्फीति को भी बढ़ावा मिल सकता है. इस स्थिति से निपटने के लिए दोनों राज्यों (झारखंड और पश्चिम बंगाल) के बीच एक सुलह की आवश्यकता है ताकि आलू की आपूर्ति फिर से बहाल हो सके और कीमतों को काबू में रखा जा सके.

टेकअवे पॉइंट्स

  • झारखंड में आलू की कीमतें आसमान छू रही हैं.
  • बंगाल से आलू की आपूर्ति में रुकावट एक बड़ी वजह है.
  • झारखंड सरकार इस समस्या को हल करने के लिए काम कर रही है.
  • यूपी से आलू की आपूर्ति एक अस्थाई विकल्प है।
  • दोनों राज्यों को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा।

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