नई दिल्ली
महाराष्ट्र में सत्ताधारी दल शिवसेना के मुख पत्र सामना में महंगाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा गया है. सामना की संपादकीय में कांग्रेस का बचाव करते हुए कहा गया है कि बीजेपी सिर्फ कोसना और चुप्पी साधना जानती है. सामना में लिखा गया है कि ‘कोरोना का संक्रमण हमारे देश में कम हो रहा होगा, फिर भी महंगाई का प्रमाण कम होने के संकेत बिल्कुल भी नहीं मिल रहे हैं, बल्कि दिन-प्रतिदन वह बढ़ ही रही है. पेट्रोल-डीजल की कीमतें सौ के पार पहुंच गई हैं.’ हाल ही में बढ़े एलपीजी की कीमतों पर लिखा गया है- बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में 25 रुपये की बढ़ोत्तरी कर दी गई है. सोमवार की मध्य रात्रि से ही दर वृद्धि लागू कर दी गई है. इसलिए 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत मुंबई में 859.50 रुपए होगी. कुछ शहरों में यही कीमत 897 रुपए तक बढ़ गई है.’
सामना में लिखा गया है कि व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत भी 68 रुपये बढ़ गई है. इसलिए उस श्रेणी के 19 किलो के एलपीजी सिलेंडर अब 1618 रुपए में मिलेंगे. मतलब घरेलू गैस और व्यावसायिक गैस सिलेंडर महंगे होने से खरीदकर खाए जानेवाले खाद्यपदार्थों के दाम भी बढ़ेंगे. ऐसी दोहरी मार आम लोगों को भुगतनी होगी. परंतु इसमें कुछ नया नहीं है. इस साल के प्रारंभ से ही पेट्रोल-डीजल और गैस दर वृद्धि का सिलसिला शुरू है.
भाजपा के नेताओं के बयानों का जिक्र करते हुए सामना में लिखा गया है कि -‘2014 से पहले जो लोग इस महंगाई के विरोध में तत्कालीन सत्ताधारियों से सवाल पूछते थे, वही पिछले छह वर्षों से केंद्र में सत्ताधारी हैं. मतलब केंद्र की सत्ताधारी महंगाई के मामले में सुविधाजनक मौन साधे होंगे, तो भी उस पार्टी के कुछ लोगों को इस महंगाई में भी पहले की ही सरकार नजर आती है. मध्य प्रदेश के एक भाजपाई नेता ने तो वर्तमान महंगाई का ठीकरा सीधे पंडित नेहरू पर फोड़ दिया. पंडित नेहरू ने 15 अगस्त, 1947 को लालकिले से देश को संबोधित करते हुए जो भाषण दिया था उसमें ‘खामियों’ के कारण वर्तमान महंगाई बढ़ी है.उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया है.’
सामना में सवाल किया गया है कि – ‘फिर वर्तमान सरकार के दौर में यदि अर्थव्यवस्था मजबूत हुई तो उसमें गिरावट क्यों आई? कोरोना का झटका 2020 में लगा. लेकिन हिंदुस्तानी अर्थव्यवस्था उसके पहले से ही धराशाई हो गई है. बीते चार-पांच वर्षों से लगातार बढ़ती महंगाई को रोका क्यों नहीं जा सका है? पेट्रोल-डीजल सौ के पार वैâसे पहुंच गया? घरेलू गैस सिलेंडर सिर्फ इसी साल भर में लगभग 165 रुपए कैसे महंगा हो गया और गैस ग्राहकों के खाते में जमा होनेवाली गैस सब्सिडी भी अब क्यों नहीं मिलती है? बेरोजगारों की संख्या 23 करोड़ तक कैसे पहुंच गई? इतिहास में देश का जीडीपी पहली बार माइनस 23 तक कैस गिर गया? इन सवालों का जवाब आम जनता को चाहिए. देश की बिगड़ी हुई अर्थव्यवस्था और सतत बढ़नेवाली महंगाई, इससे जुड़े सवाल कई होंगे लेकिन उसका उत्तर एक ही है. परंतु उसे देना केंद्र सरकार के लिए राजनैतिक दृष्टि से सुविधाजनक नहीं होगा. ‘
भाजपा पर सीधा हमला करते हुए लिखा गया है कि – ‘इसलिए कभी सुविधाजनक मौन रखना तो कभी पहले की कांग्रेस सरकार पर ठीकरा फोड़ना .अब सिर्फ यही हो रहा है. पहले ही कोरोना और लॉकडाउन की मार उस पर दर वृद्धि का फटका, ऐसे ‘चक्रव्यूह’ में देश की आम जनता फिलहाल फंस गई है. उसमें से जिन्हें जनता को बाहर निकालना चाहिए वे हाथ पर हाथ रखकर बैठे हैं. इसलिए महंगाई का जाल अधिकाधिक मजबूत होता जा रहा है और उसमें आम जनता का दम घुट रहा है. परंतु किसी को उसकी परवाह है क्या?’
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