India में ‘दावत-ए-इस्लामी’ की दान पेटियों से जमा धन को मुस्लिमों को इस्लामी शिक्षा देने की आड़ में कहाँ होता है इस्तेमाल ?

सूफी इस्लामिक बोर्ड की ओर से मतांतरण के आरोपों के बाद प्रकाश में आए पाकिस्तानी संगठन दावत-ए-इस्लामी को लेकर एक हैरतअंगेज खुलासा हुआ है। पाकिस्तानी संगठन दावत-ए-इस्लामी का नेटवर्क भारत सहित पूरी दुनिया में फैला हुआ है। इसकी स्थापना 1981 में मौलाना अबू बिलाल मुहम्मद इलियास अटारी ने की  थी। इसका संस्थापक मौलाना इलियास अटारी पाकिस्तान में रहता है। वहीं से इसका संचालन होता है। भारत में दिल्ली और मुंबई में संस्था का हेडक्वार्टर है। वर्ष 1989 से पाकिस्तान से उलमा का एक प्रतिनिधिमंडल आया था। इसके बाद शहर में दावत-ए-इस्लामी ने पांव जमाए। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के इस इस्लामिक संगठन को दान करने के लिए अहमदाबाद में 2000 से अधिक दान पेटियाँ लगी हुईं हैं। गुजरात स्थित स्थानीय अखबार, संदेश में भी इस संबंध में जानकारी दी गई है।

बता दें कि पाकिस्तानी संगठन ‘दावत-ए-इस्लामी’ वही संगठन है, जो आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। दान पेटियों में जमा धन को पाकिस्तान भेजा जाता है, फिर वहाँ से मुस्लिमों को इस्लामी शिक्षा देने की आड़ में दुबई के जरिए वापस भारत भेज दिया जाता है, मगर इसका उपयोग मुुस्लिमों का ब्रेनवॉश करने के लिए होता है। 

दावत-ए-इस्लामी पर सूफी इस्लामिक बोर्ड ने देश विरोधी गतिविधियों में चंदे का उपयोग करने और मतांतरण कराने के आरोप लगाए हैं। इसे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। दावत-ए-इस्लामी का नेटवर्क 194 देशों में फैला हुआ है।

बताया जा रहा है कि मौलाना उस्मानी ही दावत-ए-इस्लामी का केंद्र संचालित करता है। बता दें कि किशन भरवाड हत्याकांड में आरोपित के रूप में मौलाना उस्मानी का नाम सामने आया है। यह भी बताया जा रहा है कि आरोपित मौलाना उस्मानी गजवा-ए-हिंद के उस लक्ष्य की ओर काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य भारत में इस्लामिक राज की स्थापना करना है। 

बता दें कि दावत-ए-इस्लामी पाकिस्तान के कराची शहर के बाहर मौजूद है, लेकिन इसकी शाखाएँ दुनिया भर में हैं।  इसे सूफी सिद्धांतों से प्रेरित एक पुनरुत्थानवादी संगठन के तौर पर आरंभ किया गया था। इसके साथ ही, यह तब से एक चरमपंथी इस्लामी संगठन के तौर पर विकसित हो गया है। जिसकी आतंकियों से खुले तौर पर ताल्लुक हैं।

 दावत-ए-इस्लामी के सदस्य हरा अमामा (पगड़ी) बांधते हैं, हालांकि अब किसी भी रंग की पगड़ी पहनने की इजाजत दे दी गई हैा। राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की जिम्मेदारी मुंबई के सैय्यद आरिफ अली के पास है।
 

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