डेस्क। सुप्रीम कोर्ट में भाजपा की केंद्र सरकार ने बयान दिया है कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हिंदुओ को अल्पसंख्यक का दर्जा दे सकते हैं।
रविवार को कोर्ट में एक जवाब दाखिल करते समय केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि जिस तरह से राष्ट्रीय स्तर पर ईसाई, सिख, मुस्लिम, बौद्ध, पारसी और जैन को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया है ठीक उसी तरह राज्यों को यह स्वतंत्रता है कि वे भाषा एवं संख्या के आधार पर हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा दे सकें।
केंद्र सरकार के अधिवक्ता अश्विनी कुमार द्वारा ने हलफनामा दाखिल करके इस बात की जानकारी दी है।
कोर्ट में एक याचिकाकर्ता ने देश के विभिन्न राज्यों में अल्पसंख्यकों की पहचान के लिए दिशा-निर्देश तय करने की मांग को सरकार के सामने रखा था।
याचिका में कहा गया कि यहूदी, बहाई और हिंदू धर्म के अनुयायी जो लद्दाख, मिजोरम, लक्षद्वीप, कश्मीर, नगालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, पंजाब और मणिपुर में अल्पसंख्यक रूप से रहते हैं, वह अपनी पसंद से शैक्षणिक संस्थान की स्थापना व संचालन नहीं कर सकते, यह गलत है। इसी तहरीर पर उन्होंने हिंदुओ को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग की थी।
इस याचिका में उन्होंने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के लिए राष्ट्रीय आयोग अधिनियम-2004 की धारा-2 (एफ) की वैधता को चुनौती दी है।
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