चीन ने अगर दिखाई ताइवान को आंख तो क्या अमेरिका करेगा उसकी मदद

ताइवान: चीन की धमकियों को नजर अंदाज करते हुए अमेरिका की स्पीकर नैंसी पेलोसी ताइवान पहुंच गई। उन्होंने ताइवान में अपना पूरा एक दिन गुजारा और जनता को लोगो को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा वह ताइवान विकास और आगे बढ़ने की योजना लेकर आई है। हम एक साथ मिलकर विकास के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे। नैंसी पेलोसी के ताइवान के ताइवान दौरे से चीन आग बबूला हुआ बैठा है। 

वही अब जानकारों का मानना है कि तिलमिलाया चीन अब ताइवान पर हमले की योजना बना रहा है। वह कभी भी ताइवान पर हमला कर सकता है। क्योंकि चीनी सेना ने ताइवान के चारो तरफ मिलिट्री ड्रिल शुरू कर दी है। प्रोफेसर डॉनल्ड रौठवेळ डी डब्ल्यू नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे के परिपेक्ष्य में कहते हैं। कि चीन को उनका दौरा पसंद नही आया। नैंसी के ताइवान जाने पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व को चुनौती दे रहा है। क्योंकि इस साल चीन की चीनी कम्युनिस्ट पार्टी 20 वीं जयंती मना रही है। शी जिनपिंग तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का दावा करेंगे।
वही अब ऐसे में ताइवान पहुँची पेलोसी उनके दावे को कमजोर कर रही है। सूत्रों का कहना है अपने अस्तित्व पर उठती अंगुली को नीचे करने के लिये चीन ताइवान पर हमला बोल सकता है। जानकारी के लिये बता दें पेलोसी के जाते ही चीन ने नार्थ, साउथ, वेस्ट, साउथ ईस्ट में ताइवान के जल और हवाई मार्ग में मिलिट्री ड्रिल शुरू की है और सैन्य अभ्यास की घोषणा कर दी है।
ताइवान को कुछ ही देश ऐसे हैं जो अलग देश मानते हैं। ज्यादातर लोग उसे चीन का हिस्सा देखते है। अमेरिका के साथ ताइवान के राजनयिक सम्बंध है। अमेरिका ताइवान को रिलेशन्स एक्ट के तहत हथियार बेचता है। क़ानून के मुताबिक अमेरिका ताइवान को आत्मरक्षा में मदद देगा। 2021 में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यह घोषणा भी की थी कि यदि चीन ताइवान पर हमला करेगा तो अमेरिका ताइवान को मदद देगा। हालाकि बाद में व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा कि इस बयान को पॉलिसी में किसी प्रकार के बदलाव के नजरिए से नहीं देखना चाहिए।
हालाकि यह स्पष्ट है कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो अमेरिका ताइवान के पक्ष में खड़ा रहेगा और ताइवान की हर सम्भव मदद करेगा।

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