HYDERABAD GANGRAPE CASE : हाईकोर्ट ने पीडि़ता की पहचान उजागर होने पर सरकार से मांगा जवाब

[object Promise]

नई दिल्ली। विभिन्न मीडिया संस्थानों द्वारा हैदराबाद सामूहिक दुष्कर्म पीडि़ता का नाम उजागर किए जाने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र, दिल्ली सरकार और अन्य को नोटिस जारी किए। दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र, दिल्ली सरकार, तेलंगाना सरकार और कुछ मीडिया वेबसाइटों तथा मीडिया घरानों से जवाब मांगा है। पीठ में मुख्य न्यायाधीश डी.एन. पटेल और न्यायमूर्ति हरिशंकर शामिल हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को तय की है।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली के वकील यशदीप चहल की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि याचिका का मकसद दुष्कर्म पीडि़ता की पहचान उजागर करने के चलन पर लगाम लगाना है। यह भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा के अलावा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के कई फैसलों का उल्लंघन भी है।

एडवोकेट चिराग मदान और साई कृष्ण कुमार की ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य पुलिस अधिकारियों ने और उनकी साइबर सेल ने पीडि़ता और आरोपियों की लगातार पहचान उजागर होने को रोकने के लिए कुछ नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक आईपीसी की धारा 376, 376A, 376AB, 376B, 376C, 376D, 376DA, 376DB या 376E और POCSO अधिनियम के तहत अपराधों से संबंधित एफआईआर सार्वजनिक पहुंच में नहीं डाली जाएंगी।

POCSO के तहत नाबालिग पीड़ितों के मामले में, उनकी पहचान का खुलासा केवल विशेष अदालत द्वारा ही किया जा सकता है, अगर ऐसा खुलासा बच्चे के हित में हो तो। पुलिस अधिकारियों को उन सभी दस्तावेजों को जहां तक संभव हो, एक सीलबंद कवर में रखना चाहिए, जिसमें पीड़ित के नाम का खुलासा किया गया है।

हैदराबाद के एक सरकारी अस्पताल में सहायक पशु चिकित्सक के तौर पर काम करने वाली युवती का जला हुआ शव 28 नवंबर की सुबह शादनगर में एक पुलिया के नीचे से बरामद किया गया था। उसकी सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *