डेस्क। भारत के इतिहास पर हमेशा से ये आरोप लगता रहा है कि इसको तोड़ मरोड़कर पेश किया गया। ऐसे में हमेशा से कई दावे किए जातें हैं कि मुगलों समेत अन्य विदेशी शासकों ने भरतीय राजाओं के बारे में काफी झूट फैलाए। ऐसे में आज हम महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) से जुड़ी एक ऐसी बात आपको बताएंगे जिसको लेकर आपके सामने हमेशा से झूठ ही परोसा गया है।
बेशक, आपने Maharana Pratap के भाले को लेकर कई कहानियां पढ़ी होंगी, पर इन कहानियों की आड़ में महाराणा के भाले (Spear) को लेकर झूठे किस्से भी लोगों को बताए गए हैं। आज हम आपको महाराणा प्रताप के भाले का सच बताएंगे। जिसके बारे में शायद ही आपने पहले कभी सुना होगा। हैरानी की बात ये है कि इतनी बड़ी बात को इतिहास में झुठला दिया गया और किसी को कानों कान ख़बर भी नहीं हुई।
कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि उनका भाला 81 किलो का था, और उनकी छाती के कवच का वजन 72 किलो था। कई और रिपोर्ट की माने तो, महाराणा के कवच, भाले और ढाल का कुल वजन 208 किलो था। हमेशा ही यह ववाद का मुद्दा रहता है कि राणा इतने वजन के साथ जंग के मैदान में कैसे उतरते थे।
पर हम आपको बता दें कि आपने भाले, कवच, तलवारों और ढाल के वजन के बारे में जो कुछ भी पढ़ा है, उसमें बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है। आपको यह जानकर हैरानी भी होगी कि उनके भाले का वजन काफी कम था। इसको जितना बताया जाता है यह उतना नहीं था। इस बात की सही जानकारी उदयपुर में बने सिटी पैलैस म्यूजियम में मिलती है।
प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार महाराणा प्रताप के निजी अस्त्र शस्त्र का कुल वजन 35 किलो का था। वह कुल 35 किलो वजन को घोड़े पर लादकर जंग के मैदान में उतरते थे। उनके भाले का वजन लगभग 17 किलो था।
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