तालिबान: 15 अगस्त को तालिबान के अफगानिस्तान पर आधिपत्य को एक वर्ष पूरा हो गया। लेकिन अभी भी अफगानिस्तान के हालात में कोई सुधार नही है। तालिबानी सत्ता के कारण वह बेड़ियों में जकड़े है। कब धमाके की गूंज कानो में गुजने लगे पता ही नही चलता। महिलाओं की राजनीति में कोई भागीदारी नही है और न उन्हें अपनी बात प्रखरता से रखने की इजाजत। तालिबानी सत्ता से अगर कोई सबसे ज्यादा दुखी है तो अफगानिस्तान में रह रही महिलाएं क्योंकि महिलाओं को उनकी आजादी के नाम पर घर की चार दीवारी मिली है।
वही अफगानिस्तान में कुछ गिने चुने हिन्दू और ईसाई भी रहते हैं। जिनके मन मे हर वक्त मौत का डर बना रहता है। हिंदुओ की अफगानिस्तान में स्थित काफी खराब है। हर ओर उनका तिरस्कार होता है। उनकी आस्था पर उन्हें प्रताड़ना सहनी पड़ती है। अगर किसी को इस बात की भनक लग जाती है कि हिन्दू अपने इष्ट को पूज रहा है तो उनका कत्ल होने में वक्त नही लगता।
इस समय अफगानिस्तान में 10 से 11 हिन्दू बचे हैं। जो की दहशत में जी रहे हैं पहले अफगानिस्तान में हिन्दू थे लेकिन यहां हो रही निरकुंशता ने उनकी जान ले ली। अफगानिस्तान से 500 से 600 हिन्दू भारत आ गए हैं। वही जो लोग अफगानिस्तान में बचे हैं वह खौफ की जिंदगी जी रहे हैं। अफगानिस्तान में हिंदुओ को पढ़ाई लिखाई का अधिकार नही है। लोग पढ़े लिखे नही है जिसके कारण उन्हें किसी चीज की उचित जानकारी नही है।
हिंदुओ को ज्यादा बाहर निकलने की अनुमति नही है। उन्हें हमेशा अपनी आवाज को दबा कर रखना पड़ता है। वही अगर कभी वह किसी के खिलाफ कुछ बोल देते हैं तो उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। उन्हें दण्ड मिलता है।
अफगानिस्तान में रह रहे हिंदुओ का कहना है कि अब वह यहां नही रहना चाहते हैं। उनका मन अफगानिस्तान में बिल्कुल नही लगता। यहां वह प्रताड़ना सह रहे हैं। जो वास्तव में बहुत दुख देती है। हम भारत जाना चाहते हैं। क्योंकि हर ओर यहां बंदूकें दिखाई देती है। हिंदुओ को कब कहाँ से उठा लिया जाए पता नही चलता। हमे उनके मुताबिक ही रहना पड़ता है। हमारे धर्म मे दाढी बढाने का कोई प्रावधान नही है लेकिन हमें इनके अनुसार ही खुद को ढालना होता है।
हिंदुओ ने कहा कि सालन 1980 से 1990 का वक्त बहुत अच्छा था। इस समय हमारे और अफगानिस्तान के लोगो के अच्छे सम्बंध थे। लेकिन उसके बाद हम लोगो पर अत्याचार शुरू हुए और अब हमारी दशा यहां बिगड़ती जा रही है।
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