‘Game of Ayodhya’ को लेकर फिर खड़ा हो सकता बवाल!

आगामी आठ दिसम्बर को रिलीज होने वाली फिल्म ‘गेम ऑफ अयोध्या’ से नया विवाद खड़ा हो सकता है.

 

नई दिल्ली।. राजस्थान में संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती का विरोध अभी शांत ही नहीं हुआ कि आगामी आठ दिसम्बर को रिलीज होने वाली फिल्म ‘गेम ऑफ अयोध्या’ से नया विवाद खड़ा हो सकता है. फिल्म के निर्देशक और अभिनेता सुनील सिंह ने यहां मीडिया को बताया कि यह फिल्म अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराने की पृष्ठभूमि और इस घटनाक्रम में विभिन्न दलों के नेताओं की भूमिका पर बनाई गई है. फिल्म निर्देशक का दावा है कि यह फिल्म पच्चीस वर्ष पूर्व के घटनाक्रम के सच को उजागर करने वाली है. इससे कई नेताओं के चेहरे नए रूप में सामने आएंगे. उन्होंने कहा कि उन्हें आशंका है कि फिल्म का राजनीतिक विरोध हो सकता है.।
उन्होंने कहा कि देश में जब भी चुनाव आते हैं, राम मन्दिर और अयोध्या का मुद्दा गरम हो जाता है लेकिन आज की युवा पीढ़ी को बाबरी मस्जिद गिराने की घटना के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है. फिल्म को हिन्दू मुस्लिम युवक युवती के प्रेम की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है. फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी सहित तब के उत्तर प्रदेश भाजपा के नेता व राजस्थान के मौजूदा राज्यपाल कल्याण सिंह के भाषणों की क्लिपिंग को कहानी से जोड़ा गया है.

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उन्होंने कहा कि मस्जिद गिराने वाले और बचाने वाले दोनों को सत्ता मिल गई लेकिन मुद्दा वहीं का वहीं है. इस मुद्दे को लेकर हजारों लोगों की जानें गई लेकिन एक भी नेता शहीद नहीं हुआ. इससे यह लगता है कि इस मुद्दे का केवल राजनीतिक उपयोग ही किया जाता रहा है. फिल्म बनाते समय विरोध की आशंका के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने बताया कि विरोध से बचने के लिए ही पहले गेम ऑफ पावर नाम से फिल्म बनाई गई लेकिन अब गेम ऑफ अयोध्या के नाम से फिल्म को सेंसर बोर्ड ने पास की है. उन्होंने कहा कि इसमें राजनीतिक विरोध हो सकता हैं.।

दंगों के दौरान जन्मी एक प्रेम कहानी
सुनील सिंह निर्देशित फिल्म श्गेम ऑफ अयोध्याश् 1992 में हुए दंगों के बीच अयोध्या की एक प्रेम कहानी पर है जिसमें प्रेमी और प्रेमिका दोनों अलग-अलग धर्म के हैं। दावा है कि फिल्म की कहानी असली है और अयोध्या में उपजे हालात के बीच जब लोग एक दूसरे के खून के प्यासे थे, धर्म की दीवारों को तोड़ एक युवक औ युवती प्यार के बंधन में बंधे थे। फिल्म उन्हीं की प्रेम कहानी और उस दौर के हालात को बयां करती है।

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अटल-आडवाणी के भाषण के अंश मार रहे हिलोरें
फिल्म में प्रेम कहानी के बीच वर्ष 1992 को अयोध्या में उपजे हालात से संबंधित वीडियो फुटेज, दस्तावेज का भी इस्तेमाल किया गया है। 92 में हुए दंगों से पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी, गृह मंत्री रहे भाजपा के कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी समेत तमाम उस दौर के ¨हदूवादी नेताओं के भाषण के वीडियो फुटेज के साथ ही उस दौरान ली गई कारसेवकों की ली गई तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया गया है।
फिल्म का ट्रेलर तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यू ट्यूब, फेसबुक पर लाखों लोग इस फिल्म का ट्रेलर देख चुके हैं। किसी को फिल्म का ट्रेलर पसंद आ रहा तो कोई कमेंट के जरिए फिल्म को रोकने की मांग कर रहा है। कुछ लोगों ने फिल्म को लेकर विवादास्पद बयान भी देने शुरू कर दिए हैं।

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