Farmers Protest : टिकैत बंधु सरकार से दोबारा बातचीत करने के लिए तैयार, बोले – सरकार ‘बीच का रास्ता’ निकाले

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नए कृषि कानूनों के खिलाफ  पिछले 68 दिनों से आंदोलनरत राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार से कहा हम बातचीत के लिए तैयार हैं, किसान मोर्चा के जो 40 संगठनों की 40 सदस्यों की कमेटी है, उससे सरकार बात करे। राकेश टिकैत ने दिल्ली पुलिस का भी धन्यवाद किया।

उन्होंने कहा कि यह गन्ने के रेट का भी आंदोलन है, तीन क़ानूनों का भी आंदोलन है, पूरे देश में किसानों की जहां-जहां समस्या हैं, ये आंदोलन उसका है। पुलिस प्रशासन ने पहले हमारा जो सहयोग किया, उसी सहयोग की हम उम्मीद करते हैं।

इस बीच किसानों का कहना है वे सरकार से बातचीत करने के लिए तैयार हैं क्योंकि इन कानूनों को लेकर समाधान सिर्फ बातचीत से निकलने वाला है. दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सरकार से किसानों की बातचीत में महज ‘एक फोन कॉल की दूरी’ है।

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, ‘सरकार बातचीत से इस समस्या का हल निकाले. हम बातचीत के लिए तैयार हैं. किसान मोर्चे के जो 40 संगठनों की 40 सदस्यों की कमेटी है उससे सरकार बात करे।’

इससे पहले किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे टिकैत भाइयों ने रविवार को कहा था कि किसान प्रधानमंत्री की गरिमा का सम्मान करेंगे, लेकिन वे आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। नरेश और राकेश टिकैत का यह बयान ऐसे समय में आया था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत में महज एक फोन कॉल की दूरी बताया था।

टिकैत बंधुओं ने कहा था कि वे ‘बीच का रास्ता’ निकालने के लिए सरकार के साथ बातचीत को तैयार हैं. भाकियू के अध्यक्ष और बड़े भाई नरेश टिकैत ने कहा था कि बीच का रास्ता यह हो सकता है कि बीजेपी सरकार अपने शासनकाल में तीनों कानूनों को लागू नहीं करे।

इधर, राकेश टिकैत के आंसुओं का असर बरकरार है और तमाम पुराने और नए अवरोधकों के बावजूद दिल्ली-उत्तर प्रदेश की सीमा गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के तंबू लगातार बढ़ रहे हैं। केन्द्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ नवंबर के अंत से जारी किसान आंदोलन की गति गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा के बाद थम ही गई थी और ऐसा लगने लगा था कि यह शांतिपूर्ण आंदोलन अपने अंत की ओर बढ़ चला है।

आंदोलन का यह हश्र देखकर किसान नेता टिकैत पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपने आंसू नहीं रोक सके और रो पड़े, यहां तक कि उन्होंने आंदोलन के लिए अपनी जान तक देने की बात कही दी।उनके आंसू देखने के बाद आंदोलन फिर अपनी राह पर लौट रहा है और तेजी से किसानों की संख्या और उनके तंबू बढ़ रहे हैं।

इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अहम फैसले में 2 फरवरी (मंगलवार) की रात को 11 बजे तक इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने का फैसला लिया है। इसके तहत मंगलवार रात 11 बजे तक टीकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर इंटरनेट सेवा बंद रहेगी।

 

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