डेस्क। विश्व आर्थिक मंच की जेंडर गैप रिपोर्ट 2022 जारी की गई है। इसमें भारत को जो स्थान मिला है उसके मुताबिक लिंग समानता प्राप्त करने में भारत दुनिया के 146 देशों में 135 वें पायदान पर जा पहुँचा है। हालांकि पिछले वर्ष की बात करें तो यह 140वें स्थान पर था। वैसे तो एक साल में भारत ने पांच स्थानों की छलांग लगाई है। रिपोर्ट की माने तो आइसलैंड दुनिया के सबसे अधिक लिंग-समान देश के स्थान पर बना हुआ है। इसके बाद फिनलैंड, नॉर्वे, न्यूजीलैंड और स्वीडन जैसे देश आते है।
डब्ल्यूईएफ ने यह भी चेतावनी दी है कि श्रम बल में व्यापक लिंग अंतर के साथ वैश्विक स्तर पर महिलाओं के जीवन यापन में सबसे ज्यादा असर होने की उम्मीद बनी है। डब्ल्यूईएफ ने चेताया है कि लिंग अंतर को बंद करने में 132 साल तक लगेंगे।
भारत की स्थिति अपने पड़ोसियों में भी काफी खराब हो गई है। फिलहाल यह बांग्लादेश (71), नेपाल (96), श्रीलंका (110), मालदीव (117) और भूटान (126) से पीछे बना हुआ है। दक्षिण एशिया में केवल ईरान (143), पाकिस्तान (145) और अफगानिस्तान (146) ही भारत से पीछे हैं।
विश्व आर्थिक मंच ने यह भी कहा कि भारत में लिंग अंतर स्कोर ने पिछले 16 वर्षों में अपना सातवां उच्चतम स्तर रिकॉर्ड दर्ज किया है, पर यह विभिन्न मापदंडों पर सबसे खराब प्रदर्शन करने वालों में से एक माना जाता है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि, “भारत में लगभग 662 मिलियन की महिला आबादी के साथ भारत की उपलब्धि का स्तर क्षेत्रीय रैंकिंग पर भारी पड़ जाता हैं।”
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