छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में बच्चों के साथ हो रहे अत्याचार की कहानी सुनकर आपका दिल दहल जाएगा! यहाँ बच्चों के शौचालयों को बेडरूम में बदल दिया गया है, और बालिकाओं के नहाने के स्थान पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। यह सच है या झूठ? क्या सरकार इस पर कार्रवाई करेगी? आइए जानते हैं इस चौंकाने वाले मामले की पूरी सच्चाई।
शौचालय से बेडरूम: एकलव्य विद्यालय की हैरान करने वाली सच्चाई
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बच्चों के लिए बनाया गया यह आवासीय विद्यालय बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान होने की बजाए उनके लिए नर्क बन गया है। छोटेडोंगर के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में शौचालयों का इस्तेमाल बेडरूम के रूप में किया जा रहा है। तंग और गंदे कमरों में रहने वाले बच्चे अपनी पढ़ाई के सपने को पूरा करने के लिए ऐसे हालात में रहने को मजबूर हैं। क्या यह सरकार की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है? क्या यही है आदिवासी बच्चों के लिए हमारा ‘आदर्श विद्यालय’? इस पूरे मामले ने सरकार के शिक्षा के प्रति दावों पर सवाल उठाए हैं। ऐसी स्थिति में बच्चे बिना किसी निजता के, असुरक्षित और अस्वच्छता में जीवन जीने को मजबूर हैं। ये छोटे बच्चे कड़ी मेहनत के साथ अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, लेकिन सरकार उन्हें पर्याप्त सुविधाएं प्रदान करने में नाकाम रही है।
सीसीटीवी कैमरे और बालिकाओं की सुरक्षा
मामला यहीं नहीं रुकता। बालिकाओं के नहाने के स्थान पर सीसीटीवी कैमरे लगे होने से एक और विवाद सामने आया है। इससे न केवल छात्राओं की निजता का हनन हो रहा है बल्कि उनकी सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और सरकार से मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
सरकार का रिएक्शन: कार्रवाई की जांच और अल्टीमेटम
इस घटना के प्रकाश में आने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। आनन-फानन में एक जांच टीम का गठन किया गया है जो इस मामले की पड़ताल कर रही है। सहायक आयुक्त आदिवासी विकास शाखा की जाँच रिपोर्ट आने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी। लेकिन, यह कितना प्रभावी होगा, यह देखने वाली बात होगी। साथ ही आम आदमी पार्टी ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। इस अल्टीमेटम का नतीजा क्या होगा यह भी समय ही बताएगा। सर्व आदिवासी समाज ने भी घटना की कड़ी निंदा की है और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
क्या कहना है अधिकारियों का?
ADM वीरेंद्र बहादुर पांचभाई ने कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सहायक आयुक्त को जांच के लिए छोटेडोंगर भेजा गया है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। लेकिन क्या यह जांच सिर्फ खानापूर्ति होगी या वास्तव में बदलाव लाएगी, यह देखना बाकी है।
छात्रों की शिकायतें: ठंड, पानी और टूटे शौचालय
एकलव्य विद्यालय के छात्रों ने कई और गंभीर समस्याओं की शिकायत की है। स्कूल में शौचालय टूटे हुए हैं, पानी की किल्लत है और कंबलों की भी कमी है। कड़ाके की ठंड में छात्र ठिठुर रहे हैं। इससे साफ है कि विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। 6 सालों से नए भवन के निर्माण का वादा किया जा रहा है, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। क्या इतने सालों में यह भवन बनाना इतना मुश्किल है?
क्या स्कूल प्रशासन अनजान है?
स्कूल अधिक्षिका प्रभावी मिश्रा ने बताया है कि उन्होंने विभाग के उच्च अधिकारियों को इन समस्याओं के बारे में अवगत कराया है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। क्या ऐसा इसलिए है क्योंकि बच्चें आदिवासी हैं और उनकी आवाज़ दबी रह जाती है? क्या प्रशासन की लापरवाही के चलते बच्चे ऐसे हालातों में जीवन बिता रहे हैं?
क्या है आगे का रास्ता?
इस घटना ने एक बार फिर हमारे समाज में मौजूद असमानताओं को उजागर किया है। क्या हमारे आदिवासी बच्चे भी शिक्षा का अधिकार नहीं पाते हैं? क्या उनको मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी नहीं है? इस पूरे मामले की निष्पक्ष और शीघ्र जांच की जानी चाहिए और दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। आगे क्या होता है, यह आने वाले समय में देखना होगा। आज यह छोटेडोंगर का मामला है, कल यह कहीं और भी हो सकता है।
Take Away Points
- एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में शौचालयों को बेडरूम में बदल दिया गया है।
- बालिकाओं के नहाने के स्थान पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं।
- विद्यालय में पानी, शौचालय और कंबल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
- जिला प्रशासन जांच कर रहा है और आम आदमी पार्टी ने कार्रवाई के लिए अल्टीमेटम दिया है।
- यह घटना आदिवासी बच्चों के साथ हो रहे भेदभाव को उजागर करती है।

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