नई दिल्ली। दिल्ली की महिलाएं सार्वजनिक बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की घोषणा को एक राहत के रूप में देख रही हैं। इस सुविधा की घोषणा खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा की गई थी।
आस-पड़ोस के घरों में काम करने वाली 39 वर्षीय सुनीता के लिए काम के अवसर उसके क्षेत्र तक ही सीमित थे। वह सार्वजनिक परिवहन में भी यात्रा पर होने वाले वय का वहन नहीं कर सकती थी।
उसने कहा, “मैं मयूर विहार में रहती हूं और अभी भी आस-पास के घरों में काम करती हूं। जबकि मेरी अन्य सहेलियां जो यात्रा पर होने वाले खर्चो का वहन करने में सक्षम हैं, वह दूर के फ्लैट्स में काम करने जाती हैं और अधिक धन कमाती हैं। मैंने पहले भी वहां पैदल चल कर काम करने की कोशिश की, लेकिन इससे में बहुत थक जाया करती थी।”
सुनीता ने कहा, “लेकिन अब मैं यात्रा के लिए बस का इस्तेमाल करती हूं और दूर फ्लैट्स में घर का काम करने जाती हूं। अब मुझे अधिक धन मिलता है और मुझे इसे यात्रा पर खर्च भी नहीं करना पड़ता है।”
उसने बताया कि दो वर्ष पहले उसके पति का देहांत हो गया था और अब उसे दो बच्चों और अपने सास-ससुर का ध्यान खुद से ही रखना होता है।
सुनीता उन कई महिलाओं में से एक है, जो पहले काम के लिए दूर जाने से सिर्फ यात्रा खर्च के चलते बचती थीं।
मुख्यमंत्री केजरीवाल ने 29 अक्टूबर को सभी डीटीसी और क्लस्टर बसों में महिलाओं के लिए यात्रा को मुफ्त कर दिया था। जब एक महिला बस में चढ़ती है, यदि वह चाहे तो वह टिकट खरीद सकती है, अन्यथा कंडक्टर उन्हें मुफ्त में एक गुलाबी टिकट दे देता है।
इस योजना के बारे में बात करने वाली अधिकांश महिला में से कुछ ने इसमें सुधार का सुझाव भी दिया।
निकटतम बस स्टॉप से तीन किलोमीटर दूर कार्यालय तक पहुंचने के लिए एक ऑटो लेने वाली 26 वर्षीय संध्या साहू ने कहा, “यह हमें कई तरीकों से मदद कर रहा है। अगर मैं अपनी बात करूं तो मैं इस योजना के तहत हर महीने करीब 2,500 रुपये की बचत करूंगी। हालांकि, अंतिम मील कनेक्टिविटी अभी भी एक प्रमुख चिंता का विषय है।”
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