CAA : याचिकाओं की तुरंत सुनवाई से SC ने किया इंकार, कहा-देश गुजर रहा मुश्किल दौर से

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नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर दायर याचिकाओं की तुरंत सुनवाई से इंकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि देश फिलहाल मुश्किल दौर से गुजर रहा है। जब हिंसा थमेगी, तब याचिकाओं पर सुनवाई की जाएगी।

एडवोकेट विनीत ढांडा ने एक याचिका दायर कर सीएए को वैध घोषित करने के साथ राज्यों को इसे लागू करने के निर्देश देने की मांग की। साथ ही अफवाहें फैलाने के लिए कार्यकर्ताओं, छात्रों और मीडिया पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। बोबडे ने कहा कि पहली बार है जब कोई देश के कानून को संवैधानिक करार देने की मांग कर रहा है, जबकि हमारा काम वैधता जांचना है।

बेंच में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत भी शामिल थे। उनके अनुसार यह कोर्ट का काम है कि वह किसी कानून की वैधता की जांच करे। जब हिंसा का दौर थम जाएगा, तब कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट 18 दिसंबर को सीएए की संवैधानिक वैधता की विवेचना के लिए तैयार हो गया था लेकिन उसने इसके अमल पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था। सीएए के तहत 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध समुदाय के सदस्यों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है।

कोर्ट ने इसे चुनौती देने वाली 59 याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था और जनवरी के दूसरे सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया था। उल्लेखनीय है कि दिसंबर में संसद में नागरिकता बिल पास होने के बाद से ही पूर्वोत्तर समेत देशभर में हिंसक प्रदर्शन हुए। इस दौरान 21 लोगों की जान गई।

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