भोपाल। PM मोदी से लेकर उनके मंत्री तक जब ‘स्वच्छता अभियान’ की शुरुआत हुई थी तो सड़क से लेकर टॉयलेट तक की साफ-सफाई करते नजर आते थे। पीएम मोदी स्वच्छ भारत अभियान के कार्यक्रमों में झाड़ू लगाते नजर आते हैं।
भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर अपने विवादित बोल के चलते चर्चा में है। उन्होंने मध्य प्रदेश के सीहोर में कहा ‘हम नाली साफ करवाने के लिए सांसद नहीं बने हैं। आपका शौचालय साफ करवाने के लिए सांसद बिल्कुल नहीं बनाए गए हैं। हम जिस काम के लिए बनाए गए हैं, वह काम हम ईमानदारी से करेंगे।’
प्रज्ञा पूरे चुनाव के दौरान अपने विवादित बोल के चलते चर्चा में रहीं। इस दौरान उन्होंने राम मंदिर से लेकर नाथूराम गोडसे तक पर विवादित बयान दिए। यही नहीं जब उन्होंने लोकसभा में सासंद के तौर शपथ लिया, तो भी काफी विवाद हुआ था।
दरअसल शपथ लेते वक्त साध्वी प्रज्ञा ने संस्कृत में शपथ लेते वक्त अपने गुरू का नाम लिया। इसी बीच विपक्ष के कुछ सांसदों ने हंगामा शुरु कर दिया था। दो बार खलल के बाद, प्रज्ञा ठाकुर ने तीसरे प्रयास में अपना शपथ पूरा किया था।
लोकसभा चुनाव में साध्वी प्रज्ञा ने भोपाल संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के दिग्गज नेता और दो बार के मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह को हराया था। साध्वी प्रज्ञा 2008 में हुए मालेगांव विस्फोट कांड में आरोपी हैं, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई थी।
नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने के बाद से ही भोपाल की सांसद बीजेपी में खुद को अलग-थलग महसूस करती हैं। पार्टी के दिग्गज नेता उन्हें न तो कोई सार्वजनिक कार्यक्रम में बुलाते हैं।न ही मेल जोल रख रहे हैं।
एनडीए सांसदों की बैठक में भी प्रधानमंत्री मोदी ने साध्वी प्रज्ञा की अनदेखी की थी। क्योंकि पीएम मोदी ने साध्वी प्रज्ञा के बयान को लेकर कहा था कि मैं उन्हें कभी माफ नहीं करूंगा। क्योंकि उन्होंने घोर अपमानजनकर बयान दिया है।
गौरतलब है कि उन्होंने चुनाव के दौरान नाथूराम गोडसे 26/11 हमले में शहीद हुए पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे और कई विवादित बयान दिए थे। चुनाव में जीत के बाद उन्होंने कहा था कि वे सांसद के तौर पर वेतन नहीं लेंगी। वो इसका वेतन का उपयोग देश और जरूरतमंदों के लिए करेंगी।
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