स्पेन में हो रहा बड़ा प्रदर्शन, गैंगरेप कानून से जुड़ा है मामला

 

डेस्क। बीते गुरुवार को स्पेन की संसद ने इस क़ानून को मंज़ूरी दी गई है। 205 सांसदों ने इसका समर्थन और 141 ने विरोध किया और तबसे ही स्पेन में विवाद सातवें आसमान पर जा पहुँचा है।

अब स्पेन के इस कानून का बस अधिकारिक गजट में प्रकाशित होना बचा है। और फिर कुछ सप्ताह के भीतर ही यह प्रभावी हो जाएगा।

स्पेन में सरकार चला रहे वामपंथी गठबंधन का यह कहना है कि ये दुनिया में महिलाओं के अधिकारों के लिए सबसे मज़बूत क़ानूनों में शामिल होगा।

हालांकि इसके आलोचकों का यह कहना है कि ये क़ानून की नज़र में बराबरी और ‘अपराध साबित ना होने तक क़ानून की नज़र में निर्दोष होने की धारणा’ का भी उल्लंघन करता है।

आपको बताते हैं इस क़ानून और इसके पीछे के कारणों के बारे में 

इस क़ानून की जड़ें स्पेन के एक चर्चित कथित गैंगरेप मामले से जुड़ी हुई मिलती हैं।

ला मनाडा नाम से चर्चित इस मामले में 2016 में पांच लोगों के समूह ने एक 18 साल की लड़की का गैंगरेप किया था जिसको लेकर यह कानून आया है। बता दें कि ला मनाडा (समूह) एक व्हाट्सएप ग्रुप का नाम था।

इस समूह में शामिल पांच पुरुषों ने साल 2016 के पैम्पोलिना में हुए सैन फर्मिन फ़ेस्टिवल के दौरान एक लड़की के साथ गैंगरेप किया था।

वहीं स्पेन की अदालत ने इस मामले में अभियुक्तों को यौन उत्पीड़न का तो दोषी पाया था लेकिन यौन हिंसा और आक्रामकता का दोषी नहीं, इस कारण से अभियुक्तों को नौ साल की सज़ा हुई और अंतिम फ़ैसला आने तक वो ज़मानत पर रिहा भी हो गए।

जिसके बाद में स्पेन के सुप्रीम कोर्ट ने सज़ा को नौ साल से बढ़ाकर 15 साल किया 

इस मामले के बाद स्पेन में महिलाओं के ख़िलाफ़ यौन हिंसा को लेकर कई प्रदर्शन होने लगे। वहीं प्रदर्शनकारियों ने सख़्त क़ानून बनाने और अपराधियों के लिए सख़्त सज़ा का प्रावधान करने की भी मांग की थी।

इन प्रदर्शनों के बाद स्पेन की सरकार ने नया क़ानून बनाने की प्रक्रिया भी शुरू की थी। इस नए क़ानून के तहत यौन हिंसा से जुड़े क़ानून में अहम बदलाव किए गए हैं और पीड़ित महिलाओं की बेहतर देखभाल का प्रावधान भी रखा गया।

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