भारत की विदेश नीति में बदलाव: क्या यह ज़रूरी है?
क्या आप जानते हैं कि भारत की विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव आने वाला है? जी हाँ, विदेश मंत्री एस जयशंकर के हालिया बयानों से यह साफ़ हो गया है कि भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभरने के लिए अपनी विदेश नीति में व्यापक परिवर्तन करने की ज़रूरत है। यह बदलाव सिर्फ़ कुछ नियमों में बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी नीति होगी जो भारत को 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने और एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभरने में मदद करेगा। क्या आप इस बदलाव के बारे में जानना चाहते हैं? आइये जानते हैं।
विकासशील भारत की विदेश नीति: पुराना बनाम नया
भारत की मौजूदा विदेश नीति काफी हद तक उस समय के दृष्टिकोण से प्रभावित है जब भारत नव स्वतंत्र था। यह नीति गुटनिरपेक्षता पर आधारित थी और शीत युद्ध के दौरान किसी भी शक्ति-खंड में शामिल नहीं होने की वकालत करती थी। लेकिन क्या यह नीति आधुनिक भारत के लिए उचित है?
गुटनिरपेक्षता का युग बीत गया
आज का विश्व द्विध्रुवीय नहीं है; यह एक बहुध्रुवीय विश्व है जहाँ कई महाशक्तियाँ वैश्विक प्रभाव के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं। इस तरह के वातावरण में गुटनिरपेक्षता संभवतः एक ऐसी रणनीति नहीं है जिससे भारत अपना अधिकतम लाभ उठा सके। इसलिए, यह समय है जब भारत को अपनी विदेश नीति को पूरी तरह से बदलकर व्यापार और सहयोग के नए अवसरों के द्वार खोलना चाहिए।
विकास के नए आयाम
एक विकसित राष्ट्र के रूप में, भारत को विभिन्न क्षेत्रों में अपनी शक्ति और प्रभाव को और मज़बूत करना चाहिए। यह कूटनीतिक क्षमता, वैश्विक व्यापार समझौतों में बेहतर हिस्सेदारी, और महत्वपूर्ण वैश्विक मामलों पर ज़्यादा प्रभाव डालने में मददगार साबित होगा।
नयी विदेश नीति की मुख्य विशेषताएँ
जयशंकर के बयानों से यह पता चलता है कि नई विदेश नीति, नेहरूवादी अवधारणाओं से आगे जाकर भारत के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। इस नीति की कुछ मुख्य विशेषताएँ ये होंगी:
आर्थिक हितों पर ध्यान
भारत अब तेजी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्था है। इसलिए, नई विदेश नीति व्यापार, निवेश और आर्थिक विकास को प्राथमिकता देगी। यह बहुपक्षीय व्यापार समझौतों और अन्य आर्थिक भागीदारियों को मज़बूत करने पर केंद्रित होगी।
रणनीतिक भागीदारियाँ
नई विदेश नीति महत्वपूर्ण वैश्विक भागीदारों के साथ मज़बूत रणनीतिक संबंधों पर ध्यान केंद्रित करेगी। इसमें भारत और उसकी विभिन्न देशों के साथ हुई विभिन्न प्रकार की समझौतों, जैसे कि रक्षा समझौते और व्यापारिक समझौतों को आगे बढ़ाने का काम शामिल होगा।
प्रौद्योगिकी सहयोग
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत का विकास अहमियत रखता है। नई विदेश नीति अन्य देशों के साथ प्रौद्योगिकी सहयोग और ज्ञान-आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी। इससे आर्थिक विकास, वैज्ञानिक उन्नति और वैश्विक प्रभाव बढ़ाया जा सकेगा।
विकसित भारत और विदेश नीति का भविष्य
2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए नई विदेश नीति देश की महत्वाकांक्षाओं को पूरी करने में अहम भूमिका निभाएगी। यह नीति भारत को दुनिया में अपनी सही जगह दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।
आत्मनिर्भर भारत
यह नीति भारत को आत्मनिर्भर बनाना और इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने पर केंद्रित होगी। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत को एक अहम भूमिका निभाने में मददगार साबित होगी।
वैश्विक सहयोग
यह नीति क्षेत्रीय और वैश्विक संगठनों में भारत की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगी। यह नई नीति अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी आवाज़ को मज़बूत करने में भी सहायक सिद्ध होगी।
टेकअवे पॉइंट्स
- भारत की नई विदेश नीति एक विकसित राष्ट्र के रूप में उसके महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- यह नीति आर्थिक विकास, रणनीतिक भागीदारियाँ और तकनीकी सहयोग पर केंद्रित होगी।
- यह नीति भारत को आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक मंच पर उसे एक अग्रणी शक्ति बनाने में मदद करेगी।
भारत की नई विदेश नीति, देश के लिए एक नया अध्याय लेकर आएगी, जो एक स्वतंत्र और आत्मनिर्भर भारत के विकास के लिए ज़रूरी है।

Leave a Reply