डेस्क। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने मंगलवार (24, मई 2022) को दिल्ली की साकेत कोर्ट में क़ुतुब मीनार विवाद को लेकर एक दाखिल की गई याचिका का जवाब देते हुए कहा है कि अब मंदिर को दोबारा से पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता है।
ASI ने कहा कि कुतुब मीनार 1914 से एक संरक्षित स्मारक है जिसे अब बदला नहीं जा सकता। ASI ने अपने बयान में कहा कि, एक संरक्षित स्मारक में पूजा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है, इन इमारतों को संरक्षित स्मारक का दर्जा देने के बाद से ही यह प्रथा चली आ रही है।”
जानकारी के लिए बता दें कि ASI ने याचिका में हिन्दू पक्ष की मांग को गैर कानूनी और असंवैधानिक करार दिया था। उन्होंने बताया और कहा कि “यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि कुतुब मीनार काम्प्लेक्स को कई पुराने मंदिरों मंदिरों को तोड़कर बनाया गया है। कुतुब मीनार काम्प्लेक्स एक जीवित स्मारक है जिसे 1914 से संरक्षित किया गया है और किसी भी व्यक्ति को वहां जाकर पूजा करने का अधिकार नहीं है।”
आपको बता दें, विवाद शुरू होने के बाद संस्कृति मंत्रालय ने भी ASI को अपनी खुदाई रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था। कुतुब मीनार के दक्षिण में मस्जिद से 15 मीटर की दूरी पर खुदाई शुरू की जा सकती है।
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