कानपुर कटरी के शंकरपुर सराय में शूटिंग रेंज की जमीन पर कब्जा कर उसे बेचने के सुबूत अदालत को देने में पुलिस अक्षम नजर आई। पुलिस ने जिन दस्तावेजों को फर्जी बताया उसमें भी पूर्व प्रधान की संलिप्तता साबित नहीं कर पाई। इस पर साक्ष्य के अभाव में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विनोद कुमार सिंह ने पूर्व प्रधान की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए डेढ़-डेढ़ लाख के दो बंधपत्र और एक निजी बंधपत्र पर रिहा करने के आदेश दिए।
काफी देर तक चला पटाक्षेप का दौर
शुक्रवार को रामदास की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष की ओर से बार एसोसिएशन के महामंत्री कपिल दीप सचान ने बहस की। तर्क दिया कि इस जमीन पर उनके मुवक्किल ने न तो कब्जा किया है और न ही बेचा है। न ही कोई फर्जी दस्तावेज तैयार किए हैं। रजिस्ट्री के जिन दस्तावेजों को दाखिल किया गया है, यूपीजेडएलआर अधिनियम के तहत रजिस्ट्री विभाग को बैनामा करने से इंकार करते हुए तत्काल विभाग को सूचित करना चाहिए था। ऐसा होता तो जो रजिस्ट्रियां हो गई हैं, वह नहीं होती। अधिवक्ता ने किसी भी रजिस्ट्री में क्रेता, विक्रेता और गवाह न होने का तर्क भी दिया।
जमानत का विरोध करते हुए अभियोजन की ओर से तर्क दिया गया कि शूटिंग रेंज की जमीन बेचकर आरोपित ने अवैध लाभ कमाया है। मौके पर पुलिस और राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर जाकर पैमाइश कराई है जिसके बाद मुकदमा दर्ज कराया गया।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने अपने आदेश में कहा जो फर्जी दस्तावेज दाखिल किए गए हैं, उनमें आरोपित के क्रेता, विक्रेता और गवाह होने का तथ्य साबित नहीं होता है। दस्तावेजों के कूटरचना के साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं हैं। गुण दोष का अवलोकन किए बिना जमानत का आधार पर्याप्त है।
दो की अग्रिम जमानत खारिज
शूटिंग रेंज की जमीन बेचने के मामले में आरोपित राजू पाल और सुरेश पाल की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने दोनों की अर्जी खारिज कर दी। दोनों अभी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। उनकी ओर से बीते सप्ताह अग्रिम जमानत की अर्जी दी गई थी।
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