नई दिल्ली । चुनावी साल में 1 करोड़ बेरोजगारों की लाटरी लगने वाली है। मोदी सरकार देशभर में 14 बड़े राष्ट्रीय रोजगार क्षेत्र (मेगा नैशनल एंप्लॉयमेंट जोन) स्थापित करेगी। इन पर 1 लाख करोड़ रुपये की लागत आएगी और इन जोनों को बनाने का मकसद तीन साल में युवाओं को नौकरी देना है। अगर योजना को अमलीजामा पहनाया जाता है तो देशभर के बेरोजगारों को रोजगार के लिए धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार ने जो प्रारूप तैयार किया है उसके तहत जो 14 जोन बनेंगे उनकी आर्थिक रूप से पूरी मदद की जाएगी। जैसे कि टैक्स से छूट, कैपिटल सब्सिडी। इसके अलावा सरकार प्रयास करेगी इन संस्थानों की कागजी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस को ही शामिल करे।
इन इंडस्ट्रीज को मिल सकता है बूस्ट
एक अंग्रेजी वेबसाइट के अनुसार इन एंप्लाॅयमेंट जोन में युवाआें को टैक्स छूट, कैपिटल सब्सिडी आैर सिंगल विंडो क्लियरेंस जैसे कर्इ तरह के खास इन्सेन्टिव्स दिए जाएंगे। इस मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इन जोन में खाने, सीमेंट, फर्नीचर आैर इलेक्ट्राॅनिक्स के करीब 35 इंडस्ट्रियल क्लस्टर होंगे। इनमें गार्मेंट, लेदर आैर जेम्स एंड ज्वेलरी की कपंनियां भी हाेंगी। शिपिंग मिनिस्ट्री के तरफ से शुरुआती तैयारियों में नोट एक्सपेंडिंचर फाइनेंस कमिटी को अप्रुवल भेजना भी है। इसके अप्रुवल के बाद मिनिस्ट्री के तरफ से एक कैबिनेट नोट भी पेश किया जाएगा। इन जोनों पर आने वाले खर्च को केंद्र और संबंधित राज्य सरकार आधा-आधा हिस्सा वहन करेंगी। साथ ही, राज्य सरकार को कम-से-कम 2000 एकड़ का एक प्लॉट देना होगा।
खर्चा आधा-आधा करना होगा वहन
सूत्रों के मुताबिक इन क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से श्रमिक आधारित वस्त्र, चमड़ा एवं रत्ना-आभूषण जैसे क्षेत्रों के अलावा फूड, सीमेंट, फर्निचर, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के 35 इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स होंगे।
घोषणा पत्र में किया था वादा
मोदी सरकार ने 2014 के लोकसभा चुनाव घोषणा पत्र में हर वर्ष रोजगार के 2 करोड़ अवसर पैदा करने का वादा किया था। कांग्रेस नीत विपक्ष बार-बार सरकार पर निशाना साधते हुए कह चुका है कि बेरोजगारों को रोजगार देने में सरकार सफल साबित नहीं हुई। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी पीएम नरेंद्र मोदी को रोजगार मुहैया करवाने में फेल करार दे चुके हैं।
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