‘हर्ड इम्यूनिटी’ के लिए कोरोना वायरस से ‘सबको संक्रमित कर दो’ दुनियाभर में इस ‘प्लान B’ पर बहस

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नई दिल्ली। क्या कोरोना वायरस से बचने के लिए सभी लोगों को इसका शिकार बनने के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए? हो सकता है कि यह आपको मजाक लगे, आपको क्रोध भी आए, मगर दुनिया में इसे भी एक विकल्प के रूप में देखा जाने लगा है। अभी दुनिया में विशेषज्ञों के बीच इसे लेकर बहस चल रही है कि ऐसा किया जाना चाहिए या नहीं। इसके पक्ष में भी दलीलें आ रही हैं तो इसके खिलाफ भी तर्क आ रहे हैं। आखिर क्या है यह विकल्प, जिसपर इतनी बहस छिड़ी है, आइए समझते हैं।

दरअसल, लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग हमेशा के लिए लागू नहीं किया जा सकता। जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं बन जाती तब तक तो खतरा बहुत ही अधिक है। तो क्या वैक्सीन बनने तक लॉकडाउन लागू रहे? बिल्कुल नहीं, क्योंकि तब बीमारी से अधिक लोग इसे रोकने की इस कोशिश से मरने लगेंगे। अर्थव्यवस्था चौपट हो जाएगी, अभूतपूर्व बेरोजगारी बढ़ जाएगी। हो सकता है कि लोगों के भूखों मरने की नौबत तक आ जाए।

ऐसी स्थिति में दवा बनने तक ‘हर्ड इम्यूनिटी’ के कॉन्सेप्ट से लोगों की आशाएं बढ़ी हैं। इसी को प्लान बी के रूप में बताया जा रहा है कि लोगों को खुला छोड़ दें संक्रमण के लिए, इससे ‘हर्ड इम्यूनिटी’ डेवलप होगी और आखिरकार महामारी समाप्त हो जाएगी। लेकिन इसमें इतना अधिक जोखिम है कि दुनिया भर के विशेषज्ञ इसे लेकर बंट चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भी यह कतई समझदारी भरा नहीं है।

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