सीबीआई कोर्ट ने सुना दी 5 साल की सजा, लालू चले जेल

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रांची। फर्जी बिल के आधार पर चाईबासा कोषागार से वर्ष 1992-93 में फर्जी कागजात के आधार पर 33 करोड़ 13 लाख 67 हजार 534 रुपये की निकासी के मामले (आरसी 68/06) में बुधवार को बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद एवं डॉ जगन्नाथ मिश्र को 5-5 साल जेल की सजा सुनायी. साथ ही दोनों पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. सजा सुनाये जाने के बाद लालू प्रसाद सीधे बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के लिए रवाना हो गये.

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पत्रकारों ने उनसे प्रतिक्रिया पूछी, तो लालू ने कहा, नो कमेंट्स. इससे पहले कोर्ट ने इस मामले के 56 आरोपियों में से 6 राजनीतिज्ञों समेत 50 लोगों को दोषी करार दिया गया था. इसमें नौकरशाह, पशुपालन पदाधिकारी और सप्लायर शामिल हैं. जिन लोगों को सजा सुनायी गयी है, उसमें 4 महिलाएं हैं. इन्हें 3-3 साल की सजा दी गयी है. 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. बरी होने वाले 6 लोगों में दो सरकारी अधिकारी और चार सप्लायर हैं. राष्ट्रीय जनता दल ने कोर्ट द्वारा सजा का एलान करने के बाद कहा कि वे लोग लालू की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे. कोर्ट ने जैसे ही अपना फैसला सुनाया, राजद सुप्रीमो थोड़ी देर के लिए अपनी सीट पर बैठ गये. इसके बाद सीबीआई के विशेष जज एसएस प्रसाद ने पूछा कि सजा के बिंदुओं पर आज ही सुनवाई की जाये या बाद में. इस पर लालू के वकील ने कहा कि सजा के बिंदुओं पर आज ही सुनवाई कर ली जाये.

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इसके बाद सभी दोषियों के वकीलों ने अपने-अपने मुवक्किल को न्यूनतम सजा देने की अपील की. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के वकील ने भी उनके खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर कम से कम सजा देने की अपील की. समाचार चैनलों ने रिपोर्ट दी कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता लालू प्रसाद ने भी जज से कुछ बात की. उन्होंने सीबीआई जज से कहा कि उन्हें चारा घोटाला के दो मामलों में सजा सुनायी जा चुकी है. उसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें इस मामले में सजा दी जाये. दूसरी तरफ, सीबीआई के वकील ने कहा कि लालू प्रसाद बड़े भ्रष्टाचार के आरोपी हैं. इसलिए उनके साथ कोई नरमी न बरती जाये और उन्हें अधिक से अधिक सजा देने की मांग की.

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यहां बताना प्रासंगिक होगा कि चाईबासा कोषागार से निकासी के मामले में 12 दिसंबर, 2001 को चार्जशीट दाखिल की गयी थी. उस वक्त 76 लोगों को आरोपी बनाया गया था. इनमें से 14 लोगों की मौत हो चुकी है. 3 आरोपी (दीपेश चांडक,आरके दास और शैलेश प्रसाद सिंह) सरकारी गवाह बन गये. दो अन्य आरोपी सुशील झा और प्रमोद कुमार जायसवाल ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और कोर्ट उन्हें सजा सुना चुकी है. एक आरोपी फूल सिंह को कोर्ट ने भगोड़ा घोषित कर रखा है. इस तरह अब 56 आरोपी केस का सामना कर रहे थे. लालू प्रसाद को जामताड़ा और देवघर कोषागार से निकासी के मामले में पहले ही सजा सुनायी जा चुकी है.

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