नई दिल्ली, लोकसभा चुनाव 2019 से पहले सियासी दलों में तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद तेज हो गई है। ये मोर्चा उन दलों का हो सकता है जोकि न तो भाजपा से हाथ मिलाकर खुश हैं और न ही कांग्रेस की नीतियां इन्हें पसंद है। साथ ही कुछ ऐसे दल भी है जोकि देश की राजधानी पर राज करने वाली आम आदमी पार्टी से नाराज हैं।
दरअसल एक समय था जब तीसरा मोर्चे का नाम कांग्रेस को भी पसंद नहीं था- भाजपा तो हंसी उड़ाती ही थी। उनका तर्क था कि देश में द्विदलीय राजनीतिक प्रणाली ही सही है- दो दल हों। जनता उनमें से चुने। लेकिन इतने विशाल, विविधता वाले समाज-समूह में दो दल ही पर्याप्त नहीं है- दोनों पूंजीवादी नीतियों पर चलने वाले शोषण पर आधारित गैरबराबरी का समाज बनाने वाले राजनीतिक दलों को हटाने व जनवादी लोकतांत्रिकता के लिए तीसरा मोर्चा या तीसरी शक्ति जरूरी मानी गई।
इसी मोर्चे के गठन की प्रक्रिया के विभिन्न चरण हैं। इन्हीं चरणों में एक चरण में आज तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। चंद्रशेखर राव ममता से मिलने के लिए कोलकाता पहुंचे।
जहां ममता ने गुलदस्ते से उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं की यह मुलाकात गैर-भाजपा मोर्चे के गठन के लिए अहम मानी जा रही है। दोनों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत हुई या नहीं इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आ सकी है। राव राजनीतिक पार्टियों के लिए राष्ट्रीय मोर्चा बनाने को उत्सुक दिखाई दे रहे हैं।
सीएम ऑफिस से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि राव कांग्रेस और भाजपा का विकल्प तलाश रहे हैं। इसलिए केंद्र स्तर पर एक समानांतर चलने वाली सरकार होनी चाहिए। राव का कहना है कि ये तीसरा मोर्चा राजनीतिक दलों का गठबंधन नहीं होगा बल्कि ये मोर्चा जनता के लिए होगा।
बैठक के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने कहा कि ये सकारात्मक राजनीति है जिसे अच्छी शुरुआत माना जाता है। उधर पंजाब में अरविंद केजरीवाल की माफी के बाद आम आदमी पार्टी से अलग हुई लोक इंसाफ पार्टी के प्रमुख विधायक सिमरजीत बैंस ने आज घोषणा की कि 2019 के लोकभा चुनाव के लिए नया प्लेटफार्म तैयार किया जा रहा है जिसमें सुखपाल खैहरा, सुच्चा सिंह छोटेपुर व धर्मवीर गांधी जैसे नेता शामिल होंगे।
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