सिक्कों पर साझा करनी थी दो देशों को 70 साल की दोस्ती, दे दिया दगा

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कानपुर। भारत और चीन के आधिकारिक संबंध के 70 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाने के लिए 70 समझौते करने वाले चीन ने अपनी फितरत नहीं बदली। भारत स्मारक सिक्कों पर संबंधों को उकेरने की तैयारी कर रहा था और चीन ने फिर दगा देते हुए गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया। यह रजत सिक्का अप्रैल के पहले सप्ताह में एक समारोह में जारी होना था लेकिन लॉकडाउन के कारण अनुमति नहीं मिली थी। इस सिक्के की डिजाइन वित्त मंत्रालय को भेजी गई थी लेकिन वहां से अनुमति न मिलने के कारण निर्माण शुरू नहीं हुआ है। यह सिक्का किसी भी देश के साथ साझा कार्यक्रम में जारी होने वाला भारत का पहला सिक्का होता लेकिन अब इसके जारी होने पर ही संशय है।

अक्टूबर 2019 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे पर दोनों देशों में सीमाई मसलों सहित आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी का भी समझौता हुआ था। इसमें आधिकारिक संबंधों के 70 साल पूरे होने के अवसर को साझा रूप में समारोह पूर्वक मनाना भी शामिल है। इसमें 70 रुपये का साझा स्मारक सिक्का और साझा डाक टिकट जारी करना भी था। साथ ही चेन्नई कनेक्ट और वुहान स्प्रिट का नारा देकर भारत और चीन में समानता दर्शाने वाली कडिय़ों को समझने और उनका अध्ययन करने के लिए एकेडमी बनाने की भी बात थी। इस अध्ययन में महाबलीपुरम और वुहान प्रांत में समानता पर शोध होना था। लेकिन पंचशील समझौता तोड़कर 1962 में हमला करने वाले चीन ने एक बार अपनी आदत के अनुसार पीछे से वार कर दिया।

पहला साझा सिक्का होता भारत का

चीन 70 साल के संबंधों पर कुछ देशों के साथ स्मारक सिक्के पहले जारी कर चुका है। सिक्कों के अध्ययनकर्ता सुधीर लूणावत बताते हैं कि यह स्मारक सिक्का दूसरे देश के साथ जारी होने वाला पहला संयुक्त सिक्का होता। संग्राहक इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे लेकिन अब लोग चाहते हैं कि दुश्मन देश संग स्मारक सिक्का न निकले।

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