नई दिल्ली । हरिद्वार-पुरी उत्कल एक्सप्रेस के यात्रियों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। मंगलवार को फिर ट्रेन की सफाई करने वाले पानी से पेंट्रीकार में खाना पक रहा था। इसके लिए पांच हजार रुपये जुर्माना भी किया गया। इसके अलावा प्लास्टिक चावल उपयोग करने के संदेह पर सैंपल जांच के लिए कोलकाता भेजा गया है। गंदगी व खानपान की क्वालिटी को लेकर उत्कल एक्सप्रेस शुरू से सुर्खियों में रही है।
यही वजह है कि जोनल स्टेशन में इस ट्रेन की बीच-बीच में औचक जांच होती है। मंगलवार को भी आइआरसीटीसी के एरिया मैनेजर राजेंद्र बोरबन ने इस ट्रेन की पेंट्रीकार की व्यवस्था परखने के लिए निरीक्षण किया। एरिया मैनेजर पेंट्रीकार में पहुंचे।
कर्मचारी हाईड्रेन पाइप से पेंट्रीकार में रखे बर्तनों में पानी भर रहे थे। चूल्हे में खाना पक रहा था। इसमें भी वे इसी का पानी का इस्तेमाल कर रहे थे। इस पर पेंट्रीकार मैनेजर को जमकर फटकार लगाई। इस लापरवाही पर पांच हजार रुपये जुर्माना किया गया।
हालांकि कुछ कर्मचारी सफाई देने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच किसी यात्री ने खाने की क्वालिटी को लेकर शिकायत की, जिस पर सब्जियां व चावल मंगाया और जांच करने लगे। सब्जी तो ठीक थी। लेकिन जैसे ही उन्होंने चावल को हाथ से दबाया उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि यह प्लास्टिक चावल है।
संदेह के आधार पर चावल का सैंपल लिया गया। लैब में इसकी जांच कराई जाएगी। उत्कल एक्सप्रेस की पेंट्रीकार में संदेह के बाद अचानक आइआरसीटीसी सतर्क हो गया। इसके बाद उन्होंने दुर्ग-जम्मूतवी एक्सप्रेस और छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस दोनों की पेंट्रीकार की औचक जांच कर वहां पकने वाले चावल का सैंपल लिया गया।
इसके अलावा जनआहार केंद्र व कमसम फूड प्लाजा में दबिश देकर वहां से भी सैंपल लिया। इन्हें जांच के लिए कोलकाता भेजा गया।
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