सालों से सूखी पड़ी एक नदी को महिलाओं ने फिर से किया जिंदा, हर कोई है हैरान !

सालों से सूखी पड़ी एक नदी को महिलाओं ने फिर से किया जिंदा, हर कोई है हैरान !

वेल्लोर । देश का करीब आधा हिस्सा सूखे की चपेट में है। तमिलनाडु के ज्यादातर इलाके इन दिनों सूखे की मार झेल रहे हैं । कई इलाकों में पानी की भारी कमी है जिसकी आपूर्ति के लिए ज्यादातर लोग और सरकारें बारिश के भरोसे बैठे हैं।लेकिन इस सूबे का एक जिला ऐसा है जो लबालब पानी से भरा हुआ है। ऐसा नहीं है कि यहां इंद्र देवता ज्यादा मेहरबान हैं, और ऐसा भी नहीं है कि तमिलनाडु सरकार ने अलग से कोई ख़ास योजना बनायी है। बल्कि जब लोगों ने खुद ही सूखे के संकट को धूल चटाने की ठान ली, तो जो नतीजा निकला उसे देखकर हर कोई हैरान है। तमिलनाडु के वेल्लोर जिले की 20,000 महिलाओं ने सालों से सूखी पड़ी एक नदी को फिर से जिंदा करने का बेमिसाल काम अंजाम दिया है।

सालों से सूखी पड़ी एक नदी को महिलाओं ने फिर से किया जिंदा, हर कोई है हैरान !
जिंदा हुई सालों से मरी हुई नदी

वेल्लोर जिले में बहने वाली नाग नदी करीब 15 साल पहले पूरी तरह सुख गयी उसके बाद इसमें बारिश के दिनों में पानी तो आता लेकिन आगे बह कर निकल जाता। नदी सूखी तो फसल और उसके साथ ज़िंदगी भी सूख गई। लोग दूसरी जगह पलायन करने लगे, लेकिन तस्वीर बदलने के लिए बीस हजार महिलाओं ने बीड़ा उठाया. नाग नदी को फिर से पुनर्जीवित करने की ज़िम्मेदारी इन महिलाओं ने अपने कंधे पर लिया और आज सूरत ये कि सूखी नदी में पानी का बसेरा है और खेत खलिहान लहलहा उठे हैं।

नदी को पुनर्जीवित करने की पहल करने वाले चन्द्र शेखर ने कहा कि मेरे गांव के लोग पानी की समस्या के बारे में बातचीत करते थे। तभी मुझे लगा की कुछ किया जा सकता है तो मैंने आर्ट ऑफ़ लिविंग के गुरूजी से बातचीत की जिन्होंने मुझे एक वैगयानिक के पास भेजा। उन्होंने मुझे बताया की नदी के पानी को बचाने के लिए कुँए बनाए जाए और इसे बेकार बहने से रोका जाए. इसके बाद महिलाओं ने वेल्लोर की प्यास बुझाने के लिए एक बार ठान ली।

फिर श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग संस्था ने भी मदद करना शुरू किया और फिर तमिलनाडु सरकार की नींद खुली तो वो भी महिलाओं के साथ जुड़ गए और फिर चार सालों की मेहनत रंग लाई, इन महिलाओं ने दुनिया भर में संदेश दिया कि इंसानी सूखे जैसी भयावह समस्या पर भी काबू पा सकता है।

पंचायत अध्यक्ष रामसामी ने कहा कि इन्होंने पहले मुझे कहा की नदी में फिर से पानी लाया जा सकता है लेकिन मैंने इसे असंभव बताया और उसे टालता भी रहा की यह काम नहीं हो सकता लेकिन इसके बावजूद भी इन लोगों ने हिम्मत नहीं हारी और दो तीन कुएं इस नदी से जोड़कर बना दिए। इन महिलाओं को ये काम अंजाम देने में चार साल लगे हैं। .इस दौरान उन्होंने बारिश का पानी रोकने के लिए कई छोटे-छोटे बांध और कुंए बनाए। 20 फीट गहरे, 16 फीट लंबे और 6 फीट चौड़े रीचार्ज वेल को बनाने में 23 दिन और 10 लोग लगे. इनमें इकट्ठा हुए पानी का इस्तेमाल नदी को जिंदा करने में किया गया।

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