सार्वजनिक जमीनें सरकार न दे दान- गुजरात हाई कोर्ट

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गुजरात हाई कोर्ट ने सरकारी जमीनों को धार्मिक संप्रदायों को दान देने पर बेहद कड़ी टिप्‍पणी की है। हाई कोर्ट ने कहा कि गुजरात सरकार किसी व्‍यक्ति या किसी खास धार्मिक संप्रदाय को सार्वजनिक इस्‍तेमाल की जमीन को दान न दे। कोर्ट ने कहा कि जब पूरा देश धर्मस्‍थलों से भरा पड़ा है, ऐसे में राज्‍य सरकार को किसी खास संप्रदाय पर दरियादिली नहीं दिखानी चाहिए।

हाई कोर्ट ने यह टिप्‍पणी तीन पक्षीय जमीन विवाद में की जिसमें राजकोर्ट नगर निगम, एक कोऑपरेटिव सोसायटी और एक धार्मिक ट्रस्‍ट शामिल हैं। नगर निगम एक जमीन को धार्मिक ट्रस्‍ट को बेचना चाहता है लेकिन कोऑपरेटिव सोसायटी का दावा है कि यह उसकी जमीन है। कोर्ट ने कहा, ‘हम निगम को यह याद दिलाना चाहते हैं कि राज्‍य की सार्वजनिक इस्‍तेमाल की जमीन को दान के रूप में किसी व्‍यक्ति या किसी खास धार्मिक संप्रदाय को दान नहीं किया जा सकता है।’

नगर निगम के फैसले का किया विरोध
कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक इस्‍तेमाल की जमीनों को सड़क को चौड़ा करने, जमीन के अंदर पाइपलाइन डालने और ड्रेनेज सिस्‍टम के लिए इस्‍तेमाल किया जा सकता है। पीठ ने कहा, ‘यह नगर निगम से अपेक्षा की जाती है कि सार्वजनिक इस्‍तेमाल के लिए छोड़ी गई जमीन को शहरी नियोजन और नागरिक सुविधाओं को बढ़ाने में इस्‍तेमाल सुनिश्चित करे। यह देश धर्मस्‍थलों से भरा है और राज्‍य की सार्वनिक इस्‍तेमाल की जमीन को केवल मांगने मात्र पर धार्मिक इस्‍तेमाल के लिए किसी खास धार्मिक संप्रदाय या धार्मिक उद्देश्‍य के लिए नहीं दी जा सकती है।’

बता दें कि राजकोट नगर‍ निगम ने वर्ष 2005 में 577 वर्ग मीटर जमीन आदिनाथ स्‍थानकवासी जैन धार्मिक ट्रस्‍ट को बेचने का फैसला किया था। नगर निगम के इस फैसले का नालंदा कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी ने विरोध किया था। सोसायटी ने दावा किया कि यह जमीन उसकी साझा जमीन का हिस्‍सा है जिसे नगर निगम ने सार्वजनिक इस्‍तेमाल के लिए चिन्हित किया है।

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