‘सम-विषम योजना की सफलता के लिए बाइक-ऑटो को भी इसके दायरे में लाना होगा’

‘सम-विषम योजना की सफलता के लिए बाइक-ऑटो को भी इसके दायरे में लाना होगा’

 

 

सम-विषम योजना की सफलता के लिए इसके दायरे में दो पहिया और तीन पहिया वाहनों को भी लाना होगा. यह बात न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय के एक अनुसंधानकर्ता ने इसके दीर्घकालिक प्रभाव पर संदेह जताते हुए कही है.

केमिकल इंजीनियरिंग की एसोसिएट प्रोफेसर वी एफ मैकनिल ने कहा कि सम-विषम योजना का प्रभाव अंतत: असफल हो जाता है क्योंकि चालक पाबंदियों से बच निकलने के तरीके खोज लेते हैं. यह मेक्सिको सिटी एवं मनीला जैसे बड़े शहरों में देखा गया है, जहां पूर्व में यह योजना लागू की गई थी.

उन्होंने कहा कि परिवहन वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि दीर्घकाल में सम-विषम योजना कोई समाधान होगा. मैकनिल ने कहा कि उन्होंने जो आंकड़े देखे हैं, उससे संकेत मिलता है कि जनवरी महीने में सम-विषम यातायात योजना के परीक्षण के दौरान यातायात के ‘पीक आवर्स’ के दौरान पीएम 2.5 ‘कुछ हद तक’ (करीब 20 प्रतिशत) कम हुआ.

उन्होंने कहा कि हालांकि मनीला और मेक्सिको सिटी जैसे अन्य बड़े शहरों में अनुभव से पता चलता है कि सम-विषम योजना दीर्घकालिक प्रदूषण कम करने या यातायात कम करने का व्यावहारिक उपाय नहीं है. चालक पाबंदियों से बचने के लिए अन्य तरीके निकाल लेते हैं. मैकनिल ने कहा कि हवा शहर, राज्य या यहां तक कि राष्ट्रीय सीमाओं का पालन नहीं करती इसलिए उत्सर्जन को स्थानीय स्तर के साथ ही क्षेत्रीय स्तर पर भी काबू करने की जरूरत है. उन्होंने इसके लिए लॉस एंजिलिस और मेक्सिको सिटी के उदाहरण दिए जहां दिल्ली जैसी स्थिर हवा की प्रवृत्तियां हैं.उन्होंने दिल्ली में पूर्व में लागू हुई दो दौर की सम-विषम योजना का विश्लेषण करते हुए जनवरी 2016 में पायलट आधार पर लागू किए गए चरण को अप्रैल के दूसरे चरण के मुकाबले अधिक सफल बताया. ठंड के मौसम में हवा अधिक ठंडी और स्थिर होती है और आधारभूत प्रदूषण का स्तर अधिक होता है. जिससे प्रदूषण के स्तर में कोई भी गिरावट दिखाई देती है.

उन्होंने कहा, ‘दो और तीन पहिया वाहन, विशेष तौर पर टू स्ट्रोक इंजन जो मिश्रित ईंधन पर चलते हैं, वे प्रदूषण के महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं, उन्हें वायु गुणवत्ता नीति में छोड़ा नहीं जाना चाहिए. सम-विषम योजना के प्रभाव की कोई उम्मीद हो तो उन्हें पाबंदियों में शामिल किया जाना चाहिए.’ दिल्ली के प्रदूषण पर आईआईटी कानपुर के अध्ययन के अनुसार, शहर में वाहनों से होने वाले कुल प्रदूषण में ट्रकों और दो पहिया वाहनों का हिस्सा क्रमश: करीब 46 और 33 प्रतिशत है. अनुमान के अनुसार चार पहिया वाहनों का प्रदूषण में हिस्सा करीब 10 प्रतिशत है.

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