बरेली, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार का स्नेह जगजाहिर था। बरेली संसदीय सीट से संतोष गंगवार को पहला चुनाव जिताने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी ने बरेली में आठ सभाएं की। एक चुनाव में अटल बिहारी की सभाओं का यह किसी भी प्रत्याशी के लिए सर्वाधिक रिकार्ड है। अटल की बनी सरकार में दोनों बार संतोष गंगवार मंत्री रहे। पहले पेट्रोलियम राज्यमंत्री और फिर विज्ञान प्रौद्योगिकी, श्रम राज्यमंत्री।
अटल बिहारी वाजपेयी के बरेली दौरों के संस्मरण भी केंद्रीय मंत्री के दिमाग में जीवंत हैं। बरेली मीरगंज के एक इंटर कॉलेज में अटल बिहारी वाजपेयी की जनसभा होनी थी। संतोष गंगवार और धर्मपाल उन्हें लेकर मीरगंज पहुंचे। जनसभा में लोगों के बैठने के लिए दरी बिछाई गई थी। अटल जी के लिए दरी पर ही चादर बिछाई गई थी। वह चादर पर बैठ गए, लेकिन कुछ बोले नहीं। आंख मूंदकर शांतभाव से रहे। कुछ देर बाद उन्होंने संतोष गंगवार के कान में कुछ कहा। संतोष गंगवार ने एक शख्स को बुलाकर डांटना शुरू किया। लोग चौंके कि चादर बिछाने पर शायद अटल जी नाराज हुए हैं। इसी बीच अटल जी ने संतोष को चुप रहने के लिए कहा। एक उदाहरण देते हुए कहा कि जूता काटने लगे तो लोग उस जूते को नहीं काटते। बल्कि पैरों के अनुकूल बना लेते हैं। आदमी को भी प्यार चाहिए। हमें व्यक्ति को नहीं बदलना चाहिए, बल्कि सोच को बदलने पर काम करना चाहिए। ऐसे सरल स्वभाव के थे अटल जी।
संतोष के लिए अटल ने समझौता तोड़ दिया
1989 में संतोष गंगवार पहली बार लोकसभा चुनाव लड़े थे। घटनाक्रम ऐसा बना कि बरेली संसदीय सीट भाजपा से समझौते में जनता दल के पाले में चली गई। टिकट जयदीप सिंह बरार को मिला। तब संतोष गंगवार के लिए अटल बिहारी वाजपेयी ने जनता दल से समझौता तोड़ दिया था। संतोष गंगवार ही चुनाव लड़े और जीते भी।
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