नई दिल्ली पिछले दिनों इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) ने चेन्नई से 120 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लांच पैड से पीएसएलवी-सी50 रॉकेट के जरिये अपना 42वां संचार उपग्रह सीएमएस-01 (पूर्व नाम जीसैट-12आर) प्रक्षेपित किया। पीएसएलवी (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) रॉकेट का यह 52वां मिशन था और सतीश धवन स्पेस सेंटर से इसरो का यह 77वां लांच मिशन था। सीएमएस-01 को पृथ्वी की कक्षा में 42164 किलोमीटर के सबसे दूरस्थ बिंदु पर स्थापित किया गया है। इसके जरिये सी-बैंड फ्रीक्वेंसी को मजबूती मिलेगी।
सीएमएस-01 को मोबाइल फोन से लेकर टीवी तक के सिग्नलों के स्तर को सुधारने के लिए तैयार किया गया है, जो भारत के जमीनी इलाकों के अलावा अंडमान निकोबार और लक्षद्वीप को भी कवर करेगा। इसने 11 जुलाई, 2011 को लांच किए गए संचार उपग्रह जीसैट-12 का स्थान लिया है, जो आगामी सात वर्षो तक एक्सटेंडेड सी-बैंड फ्रिक्वेंसी स्पेक्ट्रम में अपनी बेहतर सेवाएं देता रहेगा। जीसैट-12 की मिशन अवधि आठ वर्ष की थी, जो पूरी हो चुकी है।
अब इसरो का अगला प्रक्षेपित किया जाने वाला रॉकेट पीएसएलवी-सी51 होगा, जो फरवरी-मार्च 2021 में लांच किया जाएगा। वह भारत के पहले स्टार्टअप (पिक्ससेल) निर्मित भू-निगरानी उपग्रह को लेकर अंतरिक्ष में जाएगा। इसके साथ स्पेसकिड्ज टीम के तहत छात्रों द्वारा निर्मित संचार उपग्रह और तीन विश्वविद्यालयों के समूह द्वारा निर्मित एक अन्य उपग्रह को भी लेकर जाएगा। पीएसएलवी एक ऐसी उन्नत प्रक्षेपण प्रणाली है, जिसे भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा अपने उपग्रहों को अंतरिक्ष की कक्षा में प्रक्षेपित करने के लिए विकसित किया गया है। यह एक चार चरण/इंजन वाला ऐसा रॉकेट है, जो ठोस तथा तरल ईंधन द्वारा वैकल्पिक रूप से छह बूस्टर मोटर्स के साथ संचालित किया जाता है। पीएसएलवी छोटे आकार के उपग्रहों को भू-स्थिर कक्षा में भी भेज सकने में सक्षम है।
बहरहाल कोरोना की वजह से प्रभावित हुए अपने मिशनों को पूरा करने में इसरो अब जी-जान से जुटा है। इसरो को आने वाले समय में चंद्रयान-3, आदित्य एल-1 उपग्रह, भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान और स्मॉल रॉकेट स्मॉल सेटेलाइट लांच व्हीकल (एसएसएलवी) का प्रक्षेपण करना है।
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