नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस दोनों मिलकर बसपा को नेस्तानबूत करने में जुट गए हैं। या कहिए कि दोनों बसपा को दीमक की तरह खत्म करने पर जुटे हुए हैं तो गलत नहीं होगा। यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों में बसपा के 15 बड़े नेता भारतीय जनता पार्टी में शामिल में हो चुके हैं। इनमें 11 नेता ऐसे हैं जो बसपा के टिकट पर विधानसभा और लोकसभा के चुनाव लड़ चुके हैं। यह नेक काम भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के अगुवाई में हो रहा है। रही-कही कसर कांग्रेस अब निकालने में जुटी हुई है। क्योंकि कांग्रेस अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नए उभरे दलित नेता चंद्रशेखर को पटाने में जुटी हुई है।
सूत्रों की मानें तो शुक्रवार को दिल्ली में दलित नेता चंद्रशेखर से कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मुलाकात की और उनसे लंबी चर्चा हुई है। मुलाकात के बड़े राजनीतिक मायने लगाए जा रहे हैं। जानकार इसे राज्य में सपा-बसपा गठबंधन के रूप में उभरी चुनौती को खत्म करने की भाजपाई रणनीति के रूप में देखते हैं। यानि इस राजनीतिक महासमुद्र में बसपा की हालत उस छोटी मछली की तरह हो रही है जिसे समुद्र की दो बड़ी मछलियां अपना निवाला बनाने में जुटी हुई हैं। भारतीय जनता पार्टी जहां बड़े बसपा नेताओं को तोड़कर अपने पाले में लाने में जुटी हुई है जिसमें उसे बड़ी सफलता मिल रही है वहीं कांग्रेस मायावती को कमजोर करने के लिए दलित युवा नेता चंद्रशेखर को अपने पाले में लाने में जुट गयी है।
चंद्रशेखर को यदि कांग्रेस अपने पाले में लाने में सफल होती है तो उसे अवश्य राजनीतिक फायदा पहुंचेगा इससे इंकार राजनीतिक पंड़ित भी नहीं कर रहे हैं। इन दोनों हमलों से मयावती का हाल उस घायल शेरनी की तरह हो गया है जिसके नाखून और दांत दोनों तोड़े जा रहे हैं। यदि भाजपा और कांग्रेस मायावती को कमजोर करने में सफल रहा तो निश्चित तौर से सपा और बसपा का गठबंधन कहीं न कहीं कमजोर होगा इससे भी इंकार कर पाना कठिन है।
लोकसभा चुनाव की मतदान प्रक्रिया शुरू होने में अब एक महीना भी नहीं बचा है। समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की घोषणा करने के दो महीने के अंदर बसपा के कम से कम 15 बड़े नेता भाजपा में शामिल हो गए हैं। मायावती और अखिलेश का इससे बुरा और क्या हो सकता है। यानि मायावती के साथ साथ अखिलेश का भी नुकसान होगा इससे भी नकारा नहीं जा सकता है।
यही नहीं आंकड़े बता रहे हैं कि बीते एक महीने में बसपा के साथ सपा, आरएलडी और कांग्रेस से कुल 28 नेता भाजपा में जा चुके हैं। लेकिन इनमें बसपा नेताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से एक नेता ने स्वीकार किया है कि उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र से टिकट पक्का करने के लिए यह कदम उठाया है।
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि सपा-बसपा गठबंधन से भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश की लड़ाई मुश्किल हो गई है। ऐसे में उसने दूसरे दलों के नेताओं के लिए कहा है कि उसके दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। इसी के तहत पार्टी ने बसपा के बड़े नेताओं को अपने यहां शामिल किया है। इनमें मंत्री पदों पर रहे नेताओं के अलावा वे नेता भी शामिल हैं जो बसपा संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। इन राजनीतिक घटनाक्रमों से वर्तमान में मायावती और उनकी पार्टी की राजनीतिक स्थिति कमजोर हो रही है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता।
Leave a Reply