शहर घूमेंगे तो सस्ती मिल जाएगी हरी मटर

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गोरखपुर। सर्दी के मौसम में सब्जियों की रानी यानी कि हरी मटर के कद्रदान ढूंढने नहीं पड़ेंगे। सीजन की पहली मटर खाने के शौकीन भी कम नहीं। बीत रहे नवंबर में इसके अलग-अलग दाम ने लोगों को बहुत छकाया। मगर, दो दिन बाद शुरू हो रहे दिसंबर में देसी मटर की धमकदार आवक रेट भिन्नता के इस खेल को खत्म कर देगी। नए आलू, हरी मटर को सर्दियों में रसोई की शान माना जाता है।

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शहर के सभी सब्जी बाजारों के अलावा गली-मोहल्लों में हरी मटर खूब बिक रही है लेकिन अकसर इसकी कीमत को लेकर ग्राहक हैरान हो जाते हैं। इसकी वजह है मटर का कहीं 55 तो कहीं 80 रुपये किलो बिकना।

रेट को लेकर हैरान होने वालों को नहीं पता सच

शहर के सभी सब्जी बाजारों के अलावा गली-मोहल्लों में हरी मटर खूब बिक रही है, लेकिन अकसर इसकी कीमत को लेकर ग्राहक हैरान हो जाते हैं। इसकी वजह है मटर का कहीं 55 तो कहीं 80 रुपये किलो बिकना। बेनीगंज में मटर 60 तो बेतियाहाता में 90 रुपये मिल रहा था। दाम में इतना ज्यादा फर्क को लेकर सब्जी विक्रेताओं और ग्राहकों में नोकझोंक भी होती रहती हैै। कीमत में उतार चढ़ाव को लेकर दो बड़ी वजह है। पहली जिस दिन मंडी में मटर की आवक ज्यादा होती है उस दिन मटर सस्ता होता है और जिस दिन कम माल आता है उस दिन महंगा बिकता है।

पंजाब और मध्‍य प्रदेश से हो रही आपूर्ति

फिलहाल मटर की 70 फीसद आपूर्ति पंजाब के अमृतसर से हो रही है, जबकि शेष मटर मध्यप्रदेश के जबलपुर से आती है। अमृतसर के मटर का दाना बड़ा और स्वाद में भी मीठा होता है, जबिक जबलपुर के मटर के दाने छोटे होते हैं और उसमें छिलका ज्यादा निकलता है। इस कारण अमृतसर का मटर औसतन थोक मंडी में 50 से 60 तथा जबलपुर का 35 से 45 रुपये किलो बिकता है। सब्जी के थोक कारोबारी हाजी रमजान मेकरानी बताते हैं कि शहर के पाश इलाकों में सब्जी बेचने वाले अमृतसर वाली मटर ले जाते हैं, क्योंकि उनके ग्राहकों को सबसे अ’छा सामान चाहिए। जिसे सस्ता चाहिए उसके लिए दूसरा मटर मौजूद है। मंडी में प्रतिदिन मटर की चार से पांच गाडिय़ां आती हैं जो अगले माह बढ़कर 10 से 12 हो जाएंगी।

दिसंबर में जालौन तो जनवरी में आएगी गाजीपुर की मटर

सस्ते और स्वादिष्ट मटर के लिए कुछ और दिन इंतजार करना पड़ेगा। दिसंबर में जालौन का माल बाजार में आते ही मटर के भाव नीचे आ जाएंगे। जनवरी में गाजीपुर, वाराणसी के अलावा लोकल मटर के बाजार में आने से कीमत घटकर 20 रुपये किलो तक होने का अनुमान है। कुल मिलाकर दिसंबर और जनवरी में ही कम दाम में मिलेगा मटर।

मंडी के अंदर महंगी, बाहर सस्ती है मटर

कई बार ऐसा भी देखने को मिला है कि मंडी के बाहर मटर खरीदने पर सस्ती पड़ रही है। मंडी के बाहर कारोबार करने में पूरी तरह छूट दिए जाने की वजह से कई लोग अमृतसर से माल मंगवाकर सड़क के किनारे बेच रहे हैं। बाहर से खरीदने वाले फुटकर विक्रेता कई तरह के कर देने से भी बच जाते हैं। बेनीगंज के सब्जी विक्रेता राजन ने बताया कि दो दिन पहले जो मटर मंडी में 250 रुपये पसेरी (पांच किलो) बिक रही थी वहीं मटर ट्रांसपोर्ट नगर में 225 रुपये पसेरी मिल गई। अगर अगर ऐसा ही रहा तो लोग मंडी जाना बंद कर देंगे।

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