शख्स के तलाक को 33 साल बाद दी कोर्ट ने मंजूरी, पूर्व पत्नी को 17 लाख देने का भी निर्देश

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गुजरात के अहमदाबाद में 33 साल पुराने तलाक के मामले में हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है। तकरीबन तीन दशक तक मामला चलने के बाद आखिरकार कोर्ट ने अहमदाबाद के रहने वाले धानजीभाई परमार के तलाक को वैधता दे दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वह अपनी पूर्व पत्नी को गुजारा भत्ता के तौर पर 17 लाख रुपये दें। कोर्ट के फैसले के साथ ही परमार को अपनी दूसरी शादी की वैधता भी मिल गई है।

सिविल कोर्ट ने दी तलाक को वैधता
प्राप्त जानकारी के अनुसार, साल 1978 में परमार ने इंदिराबेन के साथ सात फेरे लिए थे। उन्हें साल 1983 में एक बच्चा भी हुआ लेकिन दांपत्य जीवन ठीक-ठाक न चलने की वजह से परमार ने साल 1986 में तलाक के लिए एक स्थानीय अदालत में याचिका डाल दी। कोर्ट ने मामले में एकपक्षीय फैसला देते हुए परमार के तलाक को मंजूरी दे दी। इसके एक महीने के अंदर ही परमार ने रामिलाबेन से दूसरी शादी कर ली। रामिलाबेन से परमार को तीन बच्चे भी हैं।

तीन दशक बाद मिला तलाक
परमार की दूसरी शादी के सात महीने बाद ही इंदिराबेन ने सिविल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दे दी। साल 1991 में हाई कोर्ट ने सिविल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए परमार की दूसरी शादी खतरे में डाल दी। यह केस 28 साल तक पेंडिंग पड़ा रहा। तीन दशक लंबा चलने के बाद मुकदमे पर फैसला देते हुए अंततः कोर्ट ने परमार के तलाक को वैधता दे दी। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि परमार को अपनी पूर्व पत्नी इंदिराबेन को 17 लाख रुपये गुजारा भत्ता के रूप में देना होगा।

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