वेंकैया नायडू: ‘बैलट में बुलेट से ज्यादा ताकत’
दिल्ली हाट में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से आयोजित ‘आदि महोत्सव’ के उद्घाटन के मौके पर नायडू ने कहा कि आदिवासी इलाकों में कुछ लोग चरमपंथ, आतंकवाद को प्रोत्साहित करते हैं. उनका कहना है कि लोकतंत्र में बंदूक के द्वारा सफलता मिलेगी. लोकतंत्र में बंदूक के द्वारा कभी सफलता नहीं मिलती. इससे नुकसान होता है.
उप राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मैं हमेशा कहता हूं कि ‘बैलेट इज मोर पावरफुल दैन बुलेट’ (बैलेट गोली से कहीं ज्यादा ताकतवर है). बैलट द्वारा आप परिवर्तन ला सकते हैं. इस लोकतंत्र में बड़े बड़े नेताओं को लोगों ने बैलट द्वारा हराया और आम लोगों जिताया है. बंदूक से कोई फायदा नहीं होने वाला है. मैं आदिवासी मित्रों से आग्रह करता हूं कि हिंसा की प्रवृत्ति वाले लोगों को किसी तरह से प्रोत्साहन नहीं मिलना चाहिए.
वेंकैया नायडू
नायडू ने कहा कि जब प्रधानमंत्री कहते हैं- सबका साथ, सबका विकास, तो उसका मतलब सभी भारतवासियों का विकास है. जब हम कहते हैं- भारत माता की जय, वंदे मातरम या राष्ट्रवाद तो इसका मतलब कुछ वर्गों का उत्थान नहीं है, बल्कि इसका मतलब यह है कि देश में रहने वाले 130 करोड़ लोगों का विकास और उत्थान होना चाहिए.
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू
उप राष्ट्रपति ने आदिवासियों को देश का ‘मूल निवासी’ करार देते हुए कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि आदिवासियों को सिखाना चाहिए, लेकिन मैं कहता हूं कि उनसे सीखना चाहिए. आदिवासियों को यह महसूस होना चाहिए कि देश के विकास में उनकी भागीदारी है. सरकार की तरफ से उनके विकास के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं और प्रयास भी हो रहे हैं, लेकिन समाज को भी योगदान देना होगा.
नायडू ने ‘आदि महोत्सव’ में देश भर के आदिवासी शिल्पकारों-कारीगरों के सामानों की तारीफ की और कहा कि देश में इनकी कला को जो स्थान मिलना चाहिए था, वो नहीं मिला पाया है.
उन्होंने कहा कि आदिवासियों में जो प्रतिभा है उसको प्रोत्साहन मिलना चाहिए. मुझे बताया गया कि मंत्रालय की ओर से इनको प्रोत्साहित किया जा रहा है. विदेश में इनके सामानों की मांग है, लेकिन दुर्भाग्य है कि देश में ऐसा नहीं हो पाया हैं. अंग्रेजों ने 200 साल तक शासन किया. जाते-जाते वे धन लूटकर ले गए, लेकिन ऐसा लगता है कि दिमाग लूटकर लेकर चले गए. यही वजह है कि यह कमजोरी (अपनी संस्कृति को समझने की) आई है.
इस मौके पर जनजातीय कार्य मंत्री जुआल ओराम ने कहा, ‘‘मुझे यह बात बोलने में अतिश्योक्ति नहीं लग रहा है कि लोग आजकल माइनिंग और टिम्बर बिजनेस में लगे हुए है, लेकिन उससे कई गुना ज्यादा ताकतवर वन उपज है. मुझे पूरा भरोसा है कि वन उपज को बढ़ावा मिलने से देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान मिलेगा.’’ उन्होंने कहा कि महोत्सव के आयोजन का मकसद देश की राजधानी में रहने वाले लोगों को आदिवासी कला, संस्कृति और व्यंजनों से रूबरू कराना है.
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