वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman के पति पराकला प्रभाकर बोले- देश में आर्थिक मंदी लेकिन सरकार मानने को तैयार नहीं

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नई दिल्ली। देश पिछले कई महीनों से आर्थिक मंदी से जूझ रहा है। आर्थिक मंदी से निपटने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से कई घोषणाएं की जा चुकी हैं। बावजूद इसके अर्थव्यवस्था में कोई खासा सुधार नहीं आया। एक तरफ जहां केन्द्रीय सूचना प्रसारण व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद फिल्मों की कमाई के आंकड़े बताते हुए आर्थिक मंदी से आंख फेरने की कोशिश कर रहे हैं ।

भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति और बुद्धिजीवी परकला प्रभाकर ने अंगे्रजी अखबार द हिंदू में एक लेख लिखा है।

इस लेख में उन्होंने कहा है कि ‘एक के बाद एक सेक्टर में चुनौतीपूर्ण हालात होते जा रहे हैं लेकिन अभी तक बीजेपी सरकार की तरफ से अर्थव्यवस्था की हालत सुधारने की कोशिश के संकेत नहीं दिखे हैं।

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार को पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की नीतियों से सीखना चाहिए।

वहीं दूसरी तरफ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति पराकला प्रभाकर ने सरकार की आर्थिक नीतियों की धज्जियां उड़ा दी है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था गिरती चली जा रही है लेकिन सरकार आर्थिक मंदी मानने तक को तैयार ही नहीं है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति पराकला प्रभाकर ने लिखा कि ऐसे बहुत ही कम संकेत देखने को मिलते हैं जिससे लगता हो कि सरकार हालात सुधारने और अर्थव्यवस्था की चुनौतियों से निपटने कार्यनीतिक दृष्टि अपना रही हो।

द हिंदू के लिए लिखे कॉलम में प्रभाकर ने तर्क दिया है कि मौजूदा सरकार को नरसिम्हा राव- मनमोहन सिंह आर्थिक निति से सीख लेनी चाहिए. गौरतलब है कि 1991 में देश में कांग्रेस सरकार थी जिसमें नरसिम्हा राव प्रधान मंत्री और मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे।

चुनौतियों से निपटने की सरकार की कोशिशों में समस्याओं को विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को लेकर बीजेपी सरकार की अपनी कोई नीति नहीं है और ना ही उसकी ऐसी कोई नीति को विकसित करने की इच्छाशक्ति है।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के समाजवाद के सिद्धांत को तो बीजेपी नकारती है लेकिन उनकी अपनी रूपरेखा सबसे अच्छी हो सकती है जिसे आसान भाषा में पूंजीवाद, फ्री मार्केट के तौर पर देखा जा सकता है।

जो अभी तक चलन में नहीं आ सकी है। उन्होंने ये भी कहा कि ‘बीजेपी की आर्थिक विचारधारा राजनीतिक लिहाज से नेहरु मॉडल की बुराई करना ही रही है।

आर्टिकल में उन्होंने ये भी लिखा कि देश की राजनीति के केंद्र बिंदू में बैठी पार्टी जिसकी केंद्र के साथ-साथ कई राज्यों में सरकार है उसे अर्थव्यवस्था के मजबूती से बहुत कम लेना देना है। अर्थव्यवस्था के हालात भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच चर्चा का विषय नहीं बन पा रहे हैं।

आर्थिक मंदी पर क्या बोले रविशंकर प्रसाद?

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पहले निर्मला सीतारमण, फिर पियूष गोयल और अब रविशंकर प्रसाद ने आर्थिक मंदी का मजाक उड़ाया है.

रविशंकर प्रसाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, जहां उनसे देश में आर्थिक मंदी के बारे में पूछा गया। इस पर हंसते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा- मैं अटल बिहारी वापजेपी की सरकार में सूचना व प्रसारण मंत्री था और मुझे फिल्में देखना बहुत पसंद ।

फिल्में अच्छी कमाई कर रही हैं। 2 अक्टूबर को तीन फिल्में रिलीज हुईं और फिल्म आलोचक कोमल नहता ने मुझे बताया कि तीन फिल्मों में एक ही दिन में 120 करोड़ रुपए की कमाई की।

तीन फिल्मों से 120 करोड़ रुपए आना दिखाता है कि देश की अर्थव्यवस्था बिल्कुल ठीक । रविशंकर प्रसाद कोई बहस करते हैं तो आंकड़े जरूर गिनाते हैं, जैसा कि फिल्मों की कमाई में भी गिनाए, लेकिन अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है, इसके आंकड़े नहीं बताए।

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