वामपंथियों के गढ़ में भाजपा ने जमाई जड़ें, अपनी ही नीतियों में घिरी कांग्रेस !

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नई दिल्ली, स्थानीय निकायों के बाद अब केरल को नए साल में विधानसभा चुनाव के लिए तैयार होना होगा। वाम दलों का गढ़ माने जाने वाले देश के इस सबसे आखिरी राज्य में भाजपा और कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल जोर आजमाइश करना चाहते हैं। हालांकि स्थानीय निकायों के चुनाव परिणाम दोनों दलों के लिए खास उम्मीद नहीं जगाते हैं लेकिन मतदाता का मिजाज समझने के लिए इसे पतीले का चावल माना जा सकता है। जिस तरह से भाजपा की सीटों में बढ़ोतरी हुई उससे यह महसूस किया जा सकता है कि वाम मोर्चे के गढ़ में सेंध लग गई है। भाजपा ने कई जगह अपना खाता खोला है। कांग्रेस समíथत यूनाइटेड डेमोक्रेट फ्रंट (यूडीएफ) लिए स्थिति नाजुक है।

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केरल में हाल ही में स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजे आए हैं। यहां 2021 में विधानसभा चुनाव हो वाले। ऐसे में यहां वामपंथियों के गढ़ में भाजपा की बढ़त ने दिखाया है कि यहां कांग्रेस पहले से कमजोर हो रही है।

भाजपा : 24 सीटों की बढ़त

भाजपा के प्रदर्शन को सराहा नहीं जा सकता है तो नजर अंदाज भी नहीं किया जा सकता है। जहां उसका अस्तित्व ही नहीं था वहां कई सीटें जीती है। हालांकि देशभर में चल रही भाजपा लहर और बंगाल में दिख रहे प्रचंड वेग के बावजूद यहां उस तरह से पैर नहीं जम पाया। तिरुअंनतपुरम की महत्वपूर्ण सीट पार्टी हासिल नहीं कर सकी। बावजूद इसके ग्राम पंचायत चुनाव में 24 सीट जीती जबकि 2015 में 14 सीटें थीं।कोट्टयम, इदु और पथनमथिट्टा जिले में भाजपा ने फायदा उठाया।

कोट्टयम में तो पार्टी आठ सदस्यों के साथ दखल रखने की भूमिका में आ गई है। इन परिणामों से केरल के राजनीतिक विश्लेषकों की राय यह है कि किसी दल को उत्साहित या निरुत्साहित होने की जरूरत नहीं है। सभी दलों के लिए ध्यान रखने की जरूरत यह है कि स्थानीय निकाय चुनाव, विधानसभा और लोकसभा चुनाव में वोटिंग पैटर्न में काफी अंतर होता है।

सबरीमाला

सबरीमाला में हिंदू मान्यता के आधार पर महिलाओं के प्रवेश पर रोक के मुद्दे की मुहिम का गढ़ रहे पालाकाड में भाजपा आगे रही।

तिरुअंनतपुरम नगरीय निकाय

तिरुअंनतपुरम में बड़ी संख्या में शहरी आबादी है। भाजपा ने अगले विधानसभा में इस गढ़ को जीतने का लक्ष्य रखा है।

कांग्रेस

कांग्रेस समíथत यूडीएफ पार्टी को गलत सहयोगियों को जोड़ने का खामियाजा भुगतना पड़ा। केरल कांग्रेस (एम) के मनी का जाना भारी पड़ा। यह मुख्यमंत्री विजयन का मास्टर स्ट्रोक था कि केरल कांग्रेस (एम) के जोस के मनी को ईसाई वोट यूडीएफ के पाले से कटकर एलडीएफ में चले गए। इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ा। सोना तस्करी और भ्रष्टाचार का मुद्दा कांग्रेस नहीं भुना पाई।

एलडीएफ

सीपीएम समíथत लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के लिए परिणाम उत्साहजनक है। वाम दलों को सबसे बड़ा फायदा जिला पंचायत चुनाव में हुआ है। गठबंधन को 14 में से 10 सीटें मिली है। पिछली बार (एलडीएफ और यूडीएफ) के पास सात-सात सीटें थीं।

ब्लॉक पंचायत

152 सीटों में से 104 पर भी एलडीएफ ने कब्जा जमा लिया है। यूडीएफ के हिस्से में 44 सीटें ही आई हैं।

ग्राम पंचायत

941 ग्राम पंचायतों में 514 सीटों पर एलडीएफ समíथत उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। यूडीएफ को 377 सीट ही मिले हैं।

परिणाम

स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजे केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन को बहुत राहत दे गए। वे हीरो की तरह उभरे। उनके राज्य सचिव कोडियेरी बालकृष्णन को बेटे के र्डग्स और मनी लॉन्डिंग केस में छट्टी पर जाना पड़ा। विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा भी बनाया। सोना तस्करी केस में भी काफी नाम उछला लेकिन विजयन अपनी उपलब्धियां गिनाते रहे। एलडीएफ ने ईसाई, मुस्लिम और हिंदू तीन हिस्सों में बंटे केरल में धर्म निरपेक्ष छवि के साथ चुनाव लड़ा।

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