लखनऊ : अलीगंज और चारबाग सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्र, लॉकडाउन के बाद बेहिसाब बढ़ा प्रदूषण

[object Promise]

लखनऊ, बारिश प्रदूषण को धो डालती हैं,  लेकिन राजधानी के संदर्भ में ऐसा नहीं दिखता। भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (आइआइटीआर) द्वारा मंगलवार को पोस्ट मानसून एनवायरमेंट रिपोर्ट जारी की गई। शहर के नौ इलाके जहां वायु प्रदूषण की नापजोख की गई सभी स्थानों पर प्रदूषण मानक के मुकाबले अधिक मिला। अलीगंज व विकास नगर में पीएम 2.5 सबसे अधिक मिला। हालांकि अच्छी बात यह रही कि बीते दो वर्षों के मुकाबले इस बार प्रदूषण कुछ कम रिकॉर्ड किया गया।

[object Promise]
Air Pollution भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान ने जारी की पर्यावरणीय रिपोर्ट। बीते दो वर्षो के मुकाबले प्रदूषण कुछ कम रहा। व्यावसायिक ही नहीं आवासीय क्षेत्रों में भी जबरदस्त शोर। प्रदूषण के लिए वाहनों का उत्सर्जन 60 फीसद तक जिम्मेदार।

आवासीय क्षेत्रों अलीगंज, विकास नगर, इंदिरा नगर व गोमती नगर में 24 घंटों के दरम्यान पीएम 2.5 औसत 59.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पाया गया। वहीं व्यावसायिक क्षेत्र चारबाग, आलमबाग,अमीनाबाद,चौक में 63.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड हुआ।

आवासीय क्षेत्रों में अलीगंज प्रदूषण के मामले में अव्वल रहा जहां पीएम 2.5 सर्वाधिक 67.8 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया। उधर व्यावसायिक क्षेत्रों में चारबाग सबसे अधिक प्रदूषित मिला। पीएम 2.5 यहां 71.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड हुआ।

अलीगंज से सटे विकास नगर में पीएम 10 की मात्रा सबसे अधिक रिकॉर्ड हुई। यहां मानक 100 के मुकाबले 118.0 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। व्यावसायिक क्षेत्र आलमबाग में पीएम 10 की मात्रा सबसे अधिक 122.0 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मिली। बताते चलें कि पीएम10 और पीएम 2.5 हवा में मौजूद निलंबित कणों के आकार हैं।

लॉकडाउन के बाद बेहिसाब बढ़ा प्रदूषण

लॉकडाउन के दौरान यानी मानसून से पूर्व प्रदूषण स्तर बेहद कम हो गया था जिसे लोगों ने महसूस भी किया था। लेकिन अनलॉक होते ही प्रदूषण बेहिसाब बढ़ गया। यहां तक कि बारिश भी इस प्रदूषण को पूरी तरह से नहीं धो सकी। आईआईटीआर द्वारा मानसून के बाद जारी रिपोर्ट में यह साफ दिखाई दिया।

व्यावसायिक ही नहीं आवासीय क्षेत्रों में भी जबरदस्त शोर

बीते वर्षों के मुकाबले वायु प्रदूषण में जरूर कुछ कमी दिखाई दी लेकिन आवासीय हो या व्यावसायिक दोनों ही जगह शोर ने बीते सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। आईआईटीआर द्वारा सितंबर-अक्टूबर माह में की गई मॉनिटरिंग में बीते दो वर्षों के मुकाबले अधिक शोर दर्ज हुआ जो मानक से काफी अधिक रहा। अलीगंज,विकास नगर में रात में भी शोर सर्वाधिक रिकॉर्ड हुआ। वहीं गोमती नगर में अपेक्षाकृत कम शोर रहा।

रिपोर्ट के निष्कर्ष

  • सितंबर-अक्टूबर में की गई मॉनिटरिंग में लॉकडाउन की तुलना में पीएम 10 में 9.6 और पीएम 2.5 में 20. 6 प्रतिशत की वृद्धि
  • लॉकडाउन के मुकाबले सल्फर के ऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड की मात्रा क्रमशः 111 और 38.2 प्रतिशत अधिक मिली

महत्वपूर्ण तथ्य

  • शहर के नौ क्षेत्रों में की गई पड़ताल
  • आवासीय-अलीगंज, विकास नगर,इंदिरा नगर, गोमती नगर।
  • व्यवसायिक-चारबाग,आलमबाग, अमीनाबाद, चौक।
  • औद्योगिक क्षेत्र-अमौसी।

228.35 वर्ग किलोमीटर बढ़ा शहर

दिसंबर 2019 में शहर का क्षेत्रफल 402.65 वर्ग किलोमीटर था।शहर में 88 गांव को शामिल करने के बाद क्षेत्रफल बढ़कर 631 किलोमीटर हो गया है। जाहिर है कि शहर के प्राकृतिक संसाधनों पर और अधिक दबाव पड़ रहा है।

प्रदूषण के लिए वाहनों का उत्सर्जन 60 फीसद तक जिम्मेदार

विशेषज्ञों के अनुसार वायु प्रदूषण के लिए लखनऊ में 40 से 60 प्रतिशत वाहनों का उत्सर्जन जिम्मेदार है। शहर में बीते वर्ष की तुलना में मार्च,2020 तक कुल पंजीकृत वाहन 2407190 थे जो 9.70 प्रतिशत अधिक हैं।

क्या कहते हैं आईटीआर के निदेशक प्रोफेसर ? 

आईटीआर के निदेशक प्रोफेसर आलोक धावन कहते हैं कि इस अध्ययन का उद्देश्य लोगों को जागरूक करने के साथ बीते वर्षो के मुकाबले प्रदूषण स्तर कैसा रहा इसकी पड़ताल करना है। नियोजनकर्ताओं को शहर के पर्यावरणीय हालात से भी रूबरू कराना है। यह अध्ययन वर्ष में दो बार मॉनसून के पूर्व व बाद में किया जाता है।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *