राजस्थान में बच्‍चे पढ़ रहे पद्मिनी का वही इतिहास, जिस पर है ऐतराज

राजस्थान में बच्‍चे पढ़ रहे पद्मिनी का वही इतिहास, जिस पर है ऐतराज

 

 

फिल्म पद्मावती पर राजस्थान सरकार का दोहरा मापदंड समाने आया है. पद्मावती की जिस कहानी को काल्पनिक बताया जा रहा है, राजस्थान बोर्ड की 12वीं की किताबों में वही कहानी स्टूडेंट को पढ़ाई जा रही. जिसमें ये बताया गया है कि पद्मिनी को पाने के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने चितौड़ पर आक्रमण किया था और खिलजी ने शीशे में पद्मिनी की झलक देखी थी.

सरकार ने करणी सेना की इसी आपत्ति को आधार मानकर फिल्म के प्रदर्शन पर राजस्थान में रोक लगा दी. इतना ही नहीं खुद सरकार की पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर लिखा है कि पद्मिनी की शीशे में झलक देखने के बाद खिलजी उन्हे पाने के लिए लालायित हो गया था.

महारानी पदमनी के लिए खिलजी ने किया चित्तौड़ पर आक्रमण
12वीं कक्षा में इतिहास की किताब में अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ पर आक्रमण का पाठ पढ़ाया जा रहा है. लिखा है कि खिलजी के चित्तौड़ पर आक्रमण की सिर्फ वजह थी कि वो महारानी पद्मिनी को पाना चाहता था.इतना ही नहीं छात्रों को समझाया जा रहा है कि किस तरह खिलजी के चित्तौड़ पर घेरा डालने से किले में राशन का संकट खड़ा हुआ, तो रावल रतन सिंह ने खिलजी के रानी पद्मिनी को शीशे में दिखाने का प्रस्ताव स्वीकार किया और खिलजी ने शीशे में महारानी पद्मिनी की झलक देखी थी.

राजस्थान पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर भी वही कहानी 
राजस्थान बोर्ड के पाठ्यक्रम में खिलजी के पद्मिनी को पाने की वही कहानी है जिस पर आपत्ति की जा रही है. राजस्थान सरकार के पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर भी महारानी पद्मिनी के महल के बारे में जानकारी दी गई है कि खिलजी ने 1303 में पद्मिनी को पाने के लिए हमला किया था और इसी महल में खिलजी को पद्मिनी की झलक शीशे में दिखाई थी.

‘जब पाठ्यक्रम में भी यही इतिहास तो फिल्म पर बैन कैसा’
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब खुद सरकार पाठ्यक्रम में ये ही इतिहास पढ़ा रही है, तो फिर फिल्म पर प्रतिबंध कैसे लगाया. राजस्थान सरकार ने सफाई दी कि पाठ्यक्रम में अगर गलत इतिहास पढ़ा रहे हैं, तो सरकार संशोधन कर लेगी. लेकिन निर्माता को इस आधार पर फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों की तोड़ मरोड़ का हक नहीं है.

किले के लाइट एंड साउंड शो में भी चित्तौड़ की यही कहानी
हैरानी ये कि चित्तौड़ का किला भारत सरकार के पुरात्तव विभाग के पास है और किले के लाइट एंड साउंड शो में भी चित्तौड़ पर खिलजी के आक्रमण की ये ही कहानी आज भी पर्यटकों को बताई जा रही है.

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