राजस्थान का टेक्सटाइल सिटी कहीं वूहान शहर न बन जाए

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जयपुर । राजस्थान की वस्त्रनगरी यानी भीलवाड़ा में कोरोना वायरस की एंट्री कैसे हुई? कैसे यह चीन के ‘वूहान’ शहर की तरह एपीसेंटर बनता जा रहा है? इन सवालों को सरकार के पास फिलहाल कोई जवाब नहीं है। लेकिन कोरोना से शहर में 2 लोगों की मौत के बाद शहर में खौफ का माहौल है, सड़कें सुनी हैं और बाजार बंद। कर्फ्यू के सन्नाटे के बीच कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या और मौत की खबरों के बीच लोगों ने खुद को घरों में कैद कर रखा है।

प्रदेश में अब तक सर्वाधिक 862 कोरोना संदिग्धों के सैंपल टेस्ट भीलवाड़ा में हुए हैं और इनमें से 25 लोगों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। इनमें से 2 की मौत भी हो चुकी है। वहीं 89 संदिग्धों की रिपोर्ट आनी अब भी बाकी है। प्रदेश के किसी शहर में कोरोना काे लेकर इतना खौफ कहीं नहीं है। खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को भीलवाड़ा को एपीसेंटर बनने से रोकने के हरसंभव प्रयासों की बात कही है।

सीएम गहलोत ने कहा है कि भीलवाड़ा जिले को कोरोना का एपीसेंटर बनने से रोकने के लिए हरसंभव उपाय किए जाएंगे। जिले से किसी के बाहर जाने को पूरी तरह से रोकने और संदिग्ध रोगियों को आइसोलेशन में रखने के साथ ही व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग एवं जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

सुबह एक और पॉजिटिव मिलने की खबर ने फिर डराया
कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा रोगी भीलवाड़ा में हैं। खास बात यह है कि कुल 25 मरीजों में से 7 ऐसे हैं जो एक प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती हुए थे अथवा उनके परिजन हैं। इनमें से 2 मरीजों की मौत हो चुकी है। रविवार सुबह 53 वर्षीय महिला की जांच रिपोर्ट भी पॉजिटिव मिली है। महिला ने हाल ही उसी हॉस्पिटल से एंजियोप्लास्टी करवाई है जहां के 18 कर्मचारी कोरोना से पीड़ित हैं। इनमें अस्पताल के डॉक्टर, नर्सिंग स्टॉफ और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। हॉस्‍पिटल के 3 डॉक्‍टर, नर्सिंगकर्मी, टाइपिस्‍ट और 3 मरीजों के साथ-साथ उनके 4 परिजन शामिल हैं। इनमें से 4 जयपुर में बाकि 19 भीलवाड़ा के जिला अस्‍पताल के आईसोलेशन वार्ड में भर्ती हैं।

हॉस्पिटल जिसने जिंदगी नहीं मौत का वायरस फैलाया
शहर में कोरोना की जड़ बृजेश बांगड़ मेमोरियल हॉस्पिटल से जुड़ी हैं। इस अस्पताल में कार्यरत 2 डॉक्टरों की लापरवाही कहें या और कुछ और लेकिन वह खुद तो कोरोना से संक्रमित हुए ही अपने साथ काम करने वाले 16 सहकर्मियों को भी यह बीमारी दे दी। हॉस्पिटल के डॉक्टरों से सहकर्मियों और मरीजों तक ही नहीं इस वायरस एक डॉक्टर की पत्नी को भी अपनी चपेट में ले लिया।

भीलवाड़ा कैसे पहुंचा कोरोना?
हॉस्पिटल के डॉक्टरों से वहां के स्टॉफ और मरीजों तक और फिर मरीजों के परिजनों तक यह वायरस फैलता गया लेकिन यह संक्रमण हॉस्पिटल कैसे पहुंचा? इसका अभी तक काेई पुख्ता प्रमाण नहीं है। हालांकि एक आशंका जताई जा रही है कि इस अस्पताल के डॉक्टर नियाज़ खान के जरिए वायरस अस्पताल पहुंचा और फिर अन्य में फैला. जबकि, डॉ. रियाज़ ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें कहा जा रहा है कि उनके घर सऊदी अरब से मेहमान आए थे और उन्हीं से कोरोना वायरस अस्पताल में आया।

भीलवाड़ा शहर के बारे में
तत्कालीन मेवाड़ स्टेट के भीलड़ी सिक्को की टकसाल के कारण भीलवाड़ा नाम पड़ा और इस शहर ने अपने दामन में ट्रैक्टर माउंट कंप्रेसर होने का तो देश में बिहार के बाद सर्वाधिक अभ्रक उत्पादन का खिताब समेटा था। यहां के लोगों की एंटरप्रेन्योरशिप का देश लोहा मानता था। यही नहीं केवल आर्थिक ही हो बल्कि सामाजिक और धार्मिक महता के साथ भीलवाड़ा की राजनीतिक पहुंच भी कभी कम नहीं रही। वह कम हो भी क्यों जब यहां से एक बार नहीं दो -दो बार सूबे के मुख्यमंत्री रहे शिवचरण माथुर इसी जिले के मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र की नुमाइंदगी करते रहे हों। उन्हीं के प्रयासों से 80 के दशक में इस शहर की वस्त्र नगरी बनने की यात्रा शुरू हुई जो अनवरत चलती रही। आज भी देश ही नहीं विदेशों में 3000 करोड़ रुपए के सालाना निर्यात के साथ यहां का कपड़ा कारोबार 15 हजार करोड़ सालाना को पार कर चुका है।

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