मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना अंतर्गत 277 पशुपालकों को 590 गोवंशों की सुपुर्दगी करते हुए रुपए 3299000 की धनराशि उनके खाते में की गई हस्तांतरित

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रिपोर्ट:सैय्यद मकसूदुल हसन

अमेठी। जिलाधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा निराश्रित/बेसहारा गोवंश के पूर्ण रूप से भरण-पोषण प्रदान करने हेतु बेसहारा गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन के लिए मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना संचालित की गई है। इस योजना अंतर्गत निराश्रित/बेसहारा गोवंश जो कि जनपद के वृहद गौ संरक्षण केंद्र, अस्थाई गोवंश आश्रय स्थलों, कान्हा गौशाला, कांजी हाउस एवं जनपद के पंजीकृत गौशालाओं में संरक्षित हैं उन्हीं गोवंशों में से संरक्षण/भरण पोषण में सामाजिक सहभागिता बढ़ाने हेतु ऐसे व्यक्ति जो निराश्रित/बेसहारा गोवंश के भरण-पोषण, संरक्षण एवं संवर्धन के इच्छुक हैं उन्हें चिन्हित कर निराश्रित/बेसहारा गोवंशों को सुपुर्द किया जाता है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा जनपद अमेठी को 552 गोवंशों की सुपुर्दगी का लक्ष्य प्राप्त हुआ था जिसके सापेक्ष अगस्त 2019 से वर्तमान समय तक 277 पशुपालकों को 590 गोवंशों की सुपुर्दगी करते हुए लगभग 3299000 की धनराशि उनके खाते में भेजी जा चुकी है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. रमेश पाठक ने बताया कि इच्छुक किसानों/पशुपालकों/अभ्यर्थियों जो निराश्रित/बेसहारा गोवंश के भरण-पोषण करने हेतु तैयार हैं, उनको प्रतिदिन रुपए 30 प्रति गोवंश की दर से प्रतिमाह ₹900 डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में भेजी जाती है। उन्होंने बताया कि इस योजना हेतु निराश्रित/बेसहारा गोवंश (जिसके कान में छत्ता अनिवार्य होगा) के इच्छुक कृषकों/पशुपालकों को जिला प्रशासन द्वारा स्थापित एवं संचालित स्थाई/अस्थाई गोवंश संरक्षण केंद्रों के माध्यम से दिए जाएंगे जो कि चिन्हित पशुपालक को सुपुर्द किए गए गोवंश को किसी भी दशा में विक्रय नहीं करेंगे और ना ही उन्हें छुट्टा छोड़ेंगे। उन्होंने बताया कि इस योजना से लाभान्वित होने के लिए इच्छुक पशुपालक/कृषक अथवा अन्य व्यक्ति को संबंधित विकासखंड का मूल निवासी होना चाहिए तथा वर्तमान में निवासरत भी होना चाहिए, उसे पशुओं के पालन-पोषण का अनुभव होना चाहिए, व उसके पास पशुओं के रखरखाव हेतु पर्याप्त स्थान व साधन होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि इच्छुक व्यक्तियों को अधिकतम 4 गोवंश ही दिए जाएंगे, जिसमें नववस्तों की गणना नहीं की जाएगी तथा मादा गोवंश व उसका दूध पीने वाले बछड़े को एक ही माना जाएगा। उन्होंने बताया कि पात्र व्यक्तियों के नाम से आवेदन के दिनांक को किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में आधार लिंक क्रियाशील बैंक खाता होना चाहिए, दुग्ध समितियों का प्रशिक्षित पैरावेटरों/पशुमित्रों से जुड़े आवेदक कर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रक्रिया हेतु निर्धारित प्रारूप पर अपने पहचान पत्र यथा आधार कार्ड, वोटर कार्ड, राशन कार्ड, बैंक पासबुक की की छाया प्रति आवेदन पत्र के साथ भरा जाएगा, पात्र व्यक्ति अपने ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी अथवा पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

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