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“हे नारी अब अस्त्र उठा लो कोई न कान्हा आयेंगे
मत समझो इस युग को द्वापर ,ये कलयुग है कब अब ये तुम जानोगी “
अब लव जिहाद का खेल और लड़कियों को अपने जरुरत का सामान समझने का खेल अब ये वो दौर है जहां किसी भी द्रौपदी की लाज बचाने को कोई कृष्णा नही आयेंगे आज की नारी को खुद ही शस्त्र उठाना होगा तब ही जाकर नारी सशाक्तिकरण का उद्देश्य पूर्ण होगा |
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