मुंबई। महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव हुए थे। सिर्फ तीन दिन के अंदर ही यानी 24 अक्टूबर को इसके नतीजे आ गए। जनता ने भाजपा और शिवसेना गठबंधन को बहुमत सौंप दिया। इसके बावजूद 14 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक सरकार नहीं बनी है। इसका कारण है भाजपा और शिवसेना के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी जंग। इस बीच आज शुक्रवार शाम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।
फडणवीस ने कहा कि मेरे पास अच्छी खबर है। मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। मुझे महाराष्ट्र की सेवा करने का मौका मिला। मैं महाराष्ट्र, मोदी, शाह, नड्डा और हमारे सभी नेताओं का शुक्रगुजार हूं। महाराष्ट्र में हमें लोकसभा चुनावों के दौरान एक बड़ा जनादेश मिला और यहां तक कि विधानसभा में भी हमें सहयोगी के रूप में चुनावों का सामना करना पड़ा…महायुति (महागठबंधन) को स्पष्ट जनादेश मिला।
हम 160 से ज्यादा सीट जीतने में सफल रहे। भाजपा 105 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हमारा शिवसेना के साथ ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई वादा नहीं हुआ था। मेरे सामने कभी भी ऐसी नहीं हुई। मैंने खुद फोन कर उद्धव ठाकरे से बात की थी। उद्धव के करीबी लोग बेवजह बयानबाजी कर रहे हैं। जब चुनाव साथ मिलकर लड़े थे तो फिर एनसीपी से चर्चा क्यों की जा रही है।
फडणवीस ने शिवसेना सिर्फ सीएम पद को लेकर बात करना चाहती है। मेरे उद्धवजी से बहुत अच्छे संबंध हैं। शिवसेना ने हमसे चर्चा करने के बजाय एनसीपी और कांग्रेस से चर्चा की। मुझे लगता है कि नतीजे आने के बाद ही शिवसेना ने तय कर लिया था कि वह एनसीपी-कांग्रेस के साथ सरकार बनाएगी। नतीजे आने के बाद से ही शिवसेना के कुछ नेता जिस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं, हम उससे सख्त भाषा में जवाब दे सकते हैं लेकिन हमारी संस्कृति यह नहीं है।
हम बाला साहब ठाकरे के खिलाफ कभी सोच भी नहीं सकते। यहां तक कि मोदीजी ने भी कभी उद्धव ठाकरे के खिलाफ कुछ नहीं कहा। उन पर व्यक्तिगत टिप्पणी की गई फिर भी हमने कभी कुछ नहीं कहा। इससे हमें बहुत दुख हुआ है। राज्यपाल ने मुझसे कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा है। जब भी सरकार बनेगी, वह भाजपा के नेतृत्व में ही बनेगी। खरीद-फरोख्त के आरोप पर फडणवीस ने कहा कि साबित करके दिखाएं।
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